गाजियाबाद जिले से गुजर रहे एक्सप्रेसवे अब स्मार्ट तरीके से निगहबानी का काम करेंगी। ओवर स्पीड गाड़ी चलाना व किसी भी तरह की आपराधिक घटना को अंजाम देकर एक्सप्रेसवे से भागने की कोशिश भारी पड़ेगी।
नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को स्मार्ट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम से लैस करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दो महीने के अंदर दोनों ही एक्सप्रेसवे पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम पूरा होगा। इसको लेकर अथॉरिटी की तरफ से मंजूरी मिल गई है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पहले और तीसरे चरण का काम पूरा हो चुका है। तीसरे चरण में डासना से हापुड़ के बीच 22.30 किलोमीटर का हाइवे बनकर तैयार हो चुका है और उस पर अब वाहन दौड़ रहे हैं।
अब अथॉरिटी इस हिस्से में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम शुरू करने जा रहे हैं। हर आठ सौ मीटर की दूरी पर हाई रेज्यूल्यूशन के कैमरे लगाए जाएंगे जो पिलखुवा (छिजारसी) टोल के पास बनाए जा रहे कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे।
अगर कहीं पर वाहन को ओवर स्पीड पर चलाया जाता है तो ऑटोमेटिक रूप से चालान कट जाएगा, जिसे टोल प्लाजा पर ही भरना होगा। दूसरे चरण में यूपी गेट से डासना के बीच 14 लेन का एक्सप्रेसवे तैयार होने पर उसके कैमरे छिजारसी टोल और मेरठ में बनने वाले टोल से जोड़े जाएगी।
इससे एक्सप्रेसवे के किसी भी हिस्से में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर आसानी से पकड़ा जा सकेगी। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे पर भारी वाहनों के लिए 80 और फोर व्हीलर (कारों) के लिए 100 किमी प्रति घंटा की अधिक तक स्पीड लिमिट रखी गई है।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे भी रखेगा नजर
अथॉरिटी ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगले दो महीने के अंदर एक्सप्रेसवे कैमरे लग कर तैयार होगा। टेंडर छोड़ा जा चुका है बस अब कैमरे लगने बाकी हैं।
अथॉरिटी अधिकारियों का कहना है कि ईस्टर्न पेरिफेरल पर काफी पहले कैमरे लग जानने से थे, लेकिन कुछ कारणों के चलते काम में देरी हुई। डासना में ही ईस्टर्न पेरिफेरल का कंट्रोलिंग कमांड सेंटर बनाया जाएगा।
जहां बड़ी स्क्रीन पर पूरे एक्सप्रेसवे के ट्रैफिक को देखा जा सकेगा। अगर कोई वाहन एक्सीडेंट करके भागता है तो उसे कमांड सेंटर से ही पता किया जा सकेगा कि वो कहां से गुजर रहा है।
पांच जिलों की पुलिस को मिलेगी मदद
दोनों एक्सप्रेसवे के सीसीटीवी से लैस होने के बाद पश्चिमी यूपी के पांच जिलों को अपराध रोकने मदद मिल सकेगी। अगर कोई व्यक्ति किसी आपराधिक घटना को अंजाम देकर एक्सप्रेसवे से गुजरता है तो ऐसे आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
इसके लिए गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, गौतमबुद्धनगर और बागपत में पुलिस को सीसीटीवी कैमरों का फुटेज का एक्ससेस मुहैया कराया जाएगा। यानी ट्रैफिक के साथ सिविल पुलिस भी जरूरत पड़ने पर फुटेज को देख सकेगी।
नाइट विजन होंगे कैमरे
दोनों ही एक्सप्रेसवे पर नाइट विजन कैमरे लगाए जाएगी, जिनकी पिक्चर क्वालिटी इस स्तर की होगी कि गाड़ी को ड्राइव करते वक्त ड्राइवर और उसकी साइड में बैठी व्यक्ति की चलती गाड़ी में पहचान की जा सकेगी। ओवर स्पीड पर चालान काटने के लिए दोनों ही हाईवे के टोल प्लाजा पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती होगी। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर नवंबर के पहले हफ्ते और ईस्टर्न पेरिफेरल पर नवंबर के अंत तक यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर डासना से हापुड़ के बीच अब कैमरे लगाने का काम शुरू होना है। अथॉरिटी की तरफ से अप्रूवल मिल चुका है। अगर किसी ने स्पीड लिमिट तोड़़ी तो छिजारसी टोल पर ही पेनल्टी के साथ टोल अदा करना होगा। - मुदित गर्ग, डीजीएम - एनएचएआई