हर साल की तरह इस बार भी जामा मस्जिद के आस-पास की गलियां और सड़कों पर बकरों का बाजार लग चुका है। इस बाजार में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से व्यापारी अपने बेहतरीन बकरे लेकर पहुंचे हैं। विक्रेता सुहेल खुरेशी ने बताया कि पंजाबी बकरा बिट्टल डेढ़ लाख से लेकर तीन लाख तक का बिक रहा है। इस नस्ल के बच्चें गुलाबी बच्चों के नाम से लोगों के बीच मशहूर हैं, क्योंकि ये गुलाबी रंग में पैदा होते हैं, हालांकि आगे चलकर यह रंग सफेद रंग में तब्दील हो जाता है। वहीं एक विक्रेता ने बताया कि सबसे ज्यादा बकरे राजस्थान से आएं हैं।
इन नस्लों की खरीदारी कर रहे लोग
बाजार में मौजूद बकरों की कई नस्लें देखने को मिल रही हैं जिनमें सिरोही, जमुनापारी, बरबरी, तोतापरी और सबसे खास बिट्टल नस्ल प्रमुख है। बिट्टल नस्ल के बकरें इस बाजार के सबसे बड़े आकर्षण बन चुके हैं। कहीं-कहीं इस नस्ल को बमडोलिया भी कहते हैं। इनकी कीमत दो लाख से तीन लाख रूपये तक पहुंच रही है। इन बकरों की ऊंचाई, शरीर की चमक, सींगों की बनावट और चाल लोगों को आकर्षित कर रही है। वहीं पूरे मीना बाजार में सबसे किफायती नस्ल बिहार से आने वाले बरबर की है, जो कि 10 हजार से शुरु है। तोतापरी नस्ल के बकरें 65 हजार से 75 हजार में बिक रहे हैं। बाकी के राजस्थान की अजमेरा नस्ल, हरियाणा के रोहतक की बड़ौली नस्ल और सोनीपत की जमुनापारी नस्ल 40 हजार से 45 हजार में बिक रहे हैं।
बकरों को दूल्हों सा सजाया
बकरों की सजावट पर खास ध्यान दिया गया है। बकरों को खास और अलग दिखाने के लिए विक्रेताओं ने उन्हें कई रंगों में रंगा है। कई बकरों को रंग-बिरंगे हार, माला और रिबन से सजाया गया है। कुछ बकरों के कानों में टैग लगे हैं जिन पर उनका नाम, नस्ल और वजन लिखा हुआ है।