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Delhi: एमसीडी ने व्यावसायिक वाहनों के लिए बदला टोल कानून, अब हर साल पांच फीसदी बढ़ेंगी दरें; चोरी पर सख्ती

Fri, 26 Jun 2026 03:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली

सार

एमसीडी अब हर साल टोल टैक्स की दरें पांच फीसदी बढ़ा सकेगी। इसके लिए टोल टैक्स के टेंडर जारी होने से पहले सदन में प्रस्ताव लाना पड़ेगा।
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एमसीडी मुख्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में प्रवेश करने वाले व्यवसायिक वाहनों पर टोल टैक्स वसूली की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। एमसीडी अब हर साल टोल टैक्स की दरें पांच फीसदी बढ़ा सकेगी। इसके लिए टोल टैक्स के टेंडर जारी होने से पहले सदन में प्रस्ताव लाना पड़ेगा। नई व्यवस्था में टोल संग्रह, वसूली, डिजिटल निगरानी और कार्रवाई से जुड़े नए नियमों को भी सख्त किया गया है। एमसीडी ने इससे जुड़े प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।

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टोल टैक्स उपविधि-2007 में इस बदलाव से एमसीडी ने विभिन्न श्रेणियों के बड़े मालवाहक वाहनों के लिए अधिकतम टोल दरें निर्धारित कर दी हैं। छह पहिया (दो एक्सल) ट्रकों के लिए अधिकतम टोल 400 रुपये, दस पहिया (तीन एक्सल) ट्रकों के लिए 800 रुपये और चार से छह एक्सल और सात या उससे अधिक एक्सल वाले भारी ट्रकों के लिए 2,000 रुपये प्रति प्रवेश तक निर्धारित किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान संशोधन का अर्थ यह नहीं कि टोल टैक्स तत्काल बढ़ जाएगा। संशोधित कानून एमसीडी को केवल यह अधिकार देता है कि वह महंगाई, परिचालन लागत और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में दरों की समीक्षा कर सके। यदि किसी वर्ष टोल दरों में वृद्धि का प्रस्ताव लाया जाता है तो उसे एमसीडी सदन की स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। एमसीडी का मानना है कि नई व्यवस्था से दिल्ली की सीमाओं पर जाम कम होगा, टोल संग्रह अधिक पारदर्शी बनेगा और राजस्व हानि पर रोक लगेगी। टोल वसूली की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से निगरानी और प्रवर्तन भी अधिक प्रभावी हो सकेगा।
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टोल चोरी पर होगी सख्ती
एमसीडी ने टोल टैक्स उपविधि-2007 में संशोधन को मंजूरी देते हुए टोल चोरी के मामलों के लिए सख्त व्यवस्था की गई है। यदि किसी वाहन का दिल्ली में प्रवेश इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली में दर्ज हो जाता है और टोल जमा नहीं होता, तो वाहन मालिक को 72 घंटे के भीतर डिजिटल नोटिस भेजा जाएगा। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर ई-वारंट जारी किया जा सकेगा और वाहन को डिफॉल्टर घोषित किया जाएगा। इसके अलावा टोल चोरी, फर्जी नंबर प्लेट, ब्लैकलिस्टेड फास्टैग का उपयोग, गलत वाहन श्रेणी घोषित करने या इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से बचने की कोशिश को रॉन्गफुल पैसेज माना जाएगा। ऐसे मामलों में मूल टोल राशि के पांच गुना तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। लगातार उल्लंघन करने वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने, रोकने और जब्त करने का भी प्रावधान किया गया है।

तकनीक आधारित बनाना बदलाव का मकसद
एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, संशोधन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली की सीमाओं पर टोल वसूली को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाना और टोल चोरी पर प्रभावी रोक लगाना है। इसके तहत मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ), फास्टैग, आरएफआईडी और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) जैसी तकनीकों के जरिए टोल संग्रह किया जाएगा। वाहन को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी।

टोल टैक्स उपविधि के प्रमुख बिंदु

  • टोल टैक्स की दरों में हर वर्ष पांच प्रतिशत तक वृद्धि का प्रावधान जोड़ा गया
  • दरों में बढ़ोतरी के लिए हर साल अलग से सदन की मंजूरी जरूरी होगी
  • बड़े मालवाहक वाहनों के लिए नई अधिकतम टोल दरें निर्धारित की गईं
  • टोल संग्रह के लिए एमएलएफएफ, फास्टैग, आरएफआईडी और एएनपीआर तकनीक का उपयोग होगा
  • टोल नहीं चुकाने पर 72 घंटे में डिजिटल नोटिस भेजा जाएगा
  • टोल चोरी पर मूल टोल का पांच गुना तक जुर्माना लगाया जा सकेगा
  • डिफॉल्टर वाहनों को जब्त और ब्लैकलिस्ट करने का भी प्रावधान
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