भूख हड़ताल से आंदोलन करने का इस देश में लंबा इतिहास है। आजादी के समय महात्मा गांधी से लेकर अन्ना आंदोलन तक में इस हथियार को खूब आजमाया गया। इसने जनता और सरकारों पर अपना अच्छा असर भी दिखाया। लेकिन भूख हड़ताल करना आसान काम नहीं होता। यह बात आज भाजपा के नेताओं को अच्छी तरह समझ में आ गई होगी जो पिछले तीन दिनों से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भूख हड़ताल करते हुए धरना दे रहे थे।
13 दिनों से चल रहा धरना और 17 दिसंबर से चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को समाप्त करने के अवसर पर भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि उनका उद्देश्य पूरा हुआ। इसके जरिए वे दिल्ली की जनता को यह बताने में सफल रहे कि दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार निगम को काम नहीं करने दे रहे हैं। एक कविता साझा करते हुए उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर हमला भी किया।
आम आदमी पार्टी विधायक सौरभ भारद्वाज ने पहले ही भाजपा के उपवास पर तंज कसते हुए कहा है कि भाजपा नेता खाने के बिना नहीं रह सकते। वे 'खाने' के शौकीन होते हैं। वे भूख हड़ताल कर ही नहीं सकते। भाजपा नेताओं ने धरनास्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का यह कहते हुए विरोध किया था कि इससे धरनारत महिलाओं को सोने इत्यादि में परेशानी हो रही है।
एक समय दिल्ली प्रदेश इकाई में बेहद प्रभावशाली भूमिका निभा चुके एक भाजपा नेता इस समय खेमे से बाहर हैं। उनके जैसे कुछ नेता जो इस समय पार्टी में उचित महत्व न दिए जाने से परेशान हैं, उपवास के मामले पर पार्टी की हुई इस फजीहत से काफी प्रसन्न दिखाई पड़ रहे हैं। एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि केजरीवाल बहुत बड़े 'नौटंकीबाज' हैं, लेकिन भाजपा की मुश्किल यह है कि इस पार्टी में केजरीवाल की टक्कर का कोई 'नौटंकीबाज' नहीं है।