अबकी बार नए समीकरण के साथ मेयर का चुनाव होगा। पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा कुछ ज्यादा मजबूत व आम आदमी पार्टी कुछ कमजोर नजर आएगी। फिलहाल निगम में विपक्ष में बैठी भाजपा ने भले ही चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी की एक और पार्षद को अपने पक्ष में कर लिया है। सदन में आप पार्टी का पलड़ा अभी भी भारी रहेगा। लेकिन दिल्ली विधानसभा और निगम में भी सत्ता में रहने के बावजूद इस तरह आप पार्टी के पार्षद का विपक्ष के साथ जाना भाजपा के लिए निःसंदेह मनोवैज्ञानिक बढ़त है। निगम में दल बदल कानून नहीं लागू होने का फायदा लगातार भाजपा को मिलता नजर आ रहा है।