नालों के किनारे बनेंगे ग्रीनवे, तैयार होगा हरित-जल नेटवर्क
दिल्ली को हरित और जल-संवेदनशील शहर बनाने के लिए मास्टर प्लान-2047 (एमपीडी-2047) में नालों, जल निकायों और हरित क्षेत्रों को आपस में जोड़ने की योजना है। नालों के किनारे खाली और हरित पट्टियों को ग्रीनवे के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें पैदल और साइकिल ट्रैक होंगे, जो शहर के विभिन्न हरित व जल क्षेत्रों को जोड़ेंगे। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग समेत संबंधित एजेंसियां इनके विकास का काम करेंगी।
ई-कॉमर्स से बदलेगा गोदाम कारोबार, बढ़ेंगे छोटे भंडारण केंद्र
ग्रीनवे को प्राकृतिक हरित पट्टी, लैंडस्केप, वेटलैंड या दलदली क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। बारिश के पानी को रोकने और भूजल रिचार्ज में मदद के लिए बायोस्वेल्स भी बनाए जाएंगे। उपलब्ध जगह के अनुसार पार्क, योग स्थल, खेल क्षेत्र, कम्युनिटी गार्डन, वनस्पति उद्यानऔर खुले में प्रदर्शनियों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्थान बनाए जा सकते हैं। कुछ स्थानों पर बोटिंग, छोटे कियोस्क और हेरिटेज ट्रेल की सुविधा भी प्रस्तावित है। योजना में बाढ़ प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी गई है।
मास्टर प्लान दिल्ली-2047 में विकेंद्रीकृत गोदाम और वितरण केंद्रों को बढ़ावा देने का प्रावधान
घर बैठे मोबाइल से सामान मंगाने की बढ़ती आदत अब दिल्ली के गोदाम कारोबार का नक्शा बदल रही है। ऑनलाइन ऑर्डर बढ़ने के साथ सामान को ग्राहक के करीब रखने की जरूरत बढ़ रही है। जिससे आर्डर मिलते ही सामान को ग्राहक तक पहुंचाया जा सके।
इसी को देखते हुए मास्टर प्लान दिल्ली (एमपीडी)-2047 में छोटे और विकेंद्रीकृत गोदाम, वितरण केंद्र और ई-कॉमर्स आधारित माल परिवहन नेटवर्क को बढ़ावा दिया जाएगा। यानी आने वाले समय में बड़े गोदामों के साथ शहर के अलग-अलग हिस्सों के नजदीक छोटे भंडारण केंद्र भी कारोबार की नई कड़ी बनेंगे।
बड़े गोदाम से छोटे वितरण केंद्र तक
दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में ई-कॉमर्स के विस्तार के कारण स्थानीय स्तर पर माल के वितरण के लिए माल परिवहन, रसद और भंडारण बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों में नए गोदाम और छोटी भंडारण योजनाओं को लागू करने का प्रावधान किया गया है। ऑनलाइन बाजार के लिए माल को सिर्फ शहर के बाहरी हिस्सों में बड़े गोदामों में रखने के बजाय ग्राहक के नजदीक पहुंचाने की व्यवस्था पर बढ़ावा दिया जाएगा।