जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के झंडे वाले बयान का असर दिल्ली तक पहुंच गया है। दिल्ली में महबूबा मुफ्ती के खिलाफ एक वकील ने पुलिस को शिकायत दी है। वकील ने महबूबा के उस बयान को भड़काऊ और अपमानजनक बताते हुए शिकायत की है जिसमें उन्होंने कहा था कि 'डकैतों ने हमारा झंडा छीना'।
जिस वकील ने महबूबा के खिलाफ शिकायत की है उसका नाम नवीन जिंदल है। शिकायत में कहा गया है कि महबूबा मुफ्ती चुनी हुई भारत सरकार के खिलाफ अपमानजनक बयान दे रही हैं। इस बयान से दो समुदायों के बीच नफरत और अशांति फैल सकती है। यह बयान चुनी हुई सरकार के खिलाफ युद्ध भड़काने के मकसद से दिया गया है।
वकील ने अपनी शिकायत में ये भी कहा है कि महबूबा मुफ्ती के इस बयान से कानून का पालन करने वाले हर शख्स का गौरव आहत हुआ है और यह उत्तेजक बयान है।
शिकायत में महबूबा मुफ्ती के खिलाफ सख्त कार्रवाई और प्रिवेंशन ऑफ इनसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 की धारा 4 और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज करने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और दंगा भड़काने की कोशिश का आरोप लगाया है।
क्या था महबूबा मुफ्ती का बयान
चौदह माह तक नजरबंद रहीं पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने रिहा होते ही कश्मीर घाटी में अलगाववाद को हवा देनी शुरू कर दी है। नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम फारूख अब्दुल्ला के चीन की मदद से 370 बहाल करवाने के बयान के बाद महबूबा मुफ्ती ने भी शुक्रवार को अपनी अलगाववादी सोच स्पष्ट कर दी है। प्रेस कांफ्रेंस ने उन्होंने कहा कि आज के भारत के साथ वह सहज नहीं हैं।
महबूबा ने कहा, आज के भारत में अल्पसंख्यक, दलित आदि सुरक्षित नहीं हैं। यह एक सियासी जंग है जो कि डॉ. फारूक, उमर या सज्जाद लोन अकेले नहीं लड़ सकते और एक साथ होकर भी नहीं लड़ सकते। हमें लोगों का साथ चाहिए। महबूबा ने कहा, आज तक यहां के लोगों का खून बहा और अब हम जैसे लीडरों की खून देने की बारी है। हम हिंसा नहीं चाहते लेकिन वे हिंसा चाहते हैं।