वहीं सिरसपुर गांव के निवासी प्रवीन राणा ने बताया कि उनके गांव में वैक्सीनेशन सेंटर नहीं है। इस कारण ग्रामीणों को वैक्सीन लगवाने के लिए आसपास के गांव बादली, शाहबाद, कादीपुर आदि में जाना पड़ता है। कई बार तो आसपास गांव में भी वैक्सीन नहीं लग पाती है। गोयला खुर्द गांव में वैक्सीन लगाने की आरंभ नहीं हुई है। ग्रामीन पवन नलवाटी ने बताया कि ग्रामीण द्वारका में वैक्सीन लगवाने जाते है, लेकिन गांव के अधिकतर लोग वैक्सीन से वंचित हैं।
मुबारक पुर गांव निवासी बिजेंद्र सिंह बताते है कि उनके गांव के लोग वैक्सीन लगवाने के लिए काफी सक्रिय हैं, परंतु कई बार वैक्सीन नहीं होती और बीच-बीच में छुट्टी के दिन काम ही नहीं होता है। इस कारण समस्त ग्रामीणों को वैक्सीन नहीं लग पा रही है।
कई गांवों के ग्रामीणों में वैक्सीनेशन को लेकर संशय
नई दिल्ली। ककरौला एवं नवादा गांव के ग्रामीणों में वैक्सीन को लेकर कई प्रकार के संदेह है। उनमें वैक्सीन को लेकर डर का माहौल बना हुआ है। ककरौला गांव के नीरज का कहना है कि वैक्सीनेशन के कई दिन बाद उनके गांव के चार-पांच लोगों तबीयत बिगड़ और उनकी मौत हो गई। इस कारण ग्रामीण वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते। वे कोरोना से बचाव के लिए काफी अधिक सावधानी बरत रहे है। नवादा गांव में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण पुलकित ने बताया कि लोग वैक्सीनेशन के लिए आगे आने में हिचक रहे है। दरअसल उनके गांव में वैक्सीनेशन के बाद कुछ लोगों की मौत हो हुई हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस और उसकी वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में सवालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। इसके लिए सरकार और प्रशासन को लोगों के बीच और अधिक जागरूकता लाने की आवश्यकता है।