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बेबस लोग: दिल्ली के अधिकतर गांवों में वैक्सीन लगाने की नहीं हुई शुरुआत, रोजाना हो रहीं मौतें

Tue, 18 May 2021 09:09 AM IST
पूजा त्रिपाठी विनोद डबास, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बापरौला निवासी डॉ. आरबी सोलंकी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर की दस्तक के बाद उनके गांव में वैक्सीन लगाने की शुरुआत हो गई है। इसी तरह गांव मदनपुर, माजरा डबास, अलीपुर गांव में भी वैक्सीन लगाना शुरू कर दिया है, लेकिन आसपास के गांवों एवं कालोनियों के लोग भी इन गांव में वैक्सीन लगवाने आ रहे हैं।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश की राजधानी दिल्ली के करीब-करीब सभी गांवों में कोरोना दस्तक दे चुका है और गांवों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौत हो रही है। इस कारण ग्रामीण भयभीत हो गए हैं और अधिकतर गांवों के ग्रामीण कोरोना से पार पाने के लिए वैक्सीन लगवाने के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं, लेकिन ज्यादातर ग्रामीणों से वैक्सीन दूर है और वैक्सीन लगवाने के लिए भटक रहे हैं। दरअसल सभी गांवों में डिस्पेंसरी की सुविधा नहीं है और ग्रामीण इलाके में डिस्पेंसरियों में वैक्सीन लगाने की शुरुआत हुई है।

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दिचाऊं कलां गांव के समुंद्र सिंह बताते है कि कोरोना की रोकथाम के लिए एक भी कदम नहीं उठाया गया है। गांव में सैनिटाइजेशन का कार्य भी नहीं हुआ है। वहीं इसी गांव के प्रदीप शौकीन के अनुसार कुछ दिनों के दौरान गांव में 20 से ज्यादा लोग मरने के बाद सरकारी स्कूल में वैक्सीन केंद्र बनाने के लिए एसडीएम से आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने ग्रामीणों को कोरोना से निजात दिलाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। उनके गांव में डिस्पेंसरी की सुविधा नहीं है।

बापरौला निवासी डॉ. आरबी सोलंकी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर की दस्तक के बाद उनके गांव में वैक्सीन लगाने की शुरुआत हो गई है। इसी तरह गांव मदनपुर, माजरा डबास, अलीपुर गांव में भी वैक्सीन लगाना शुरू कर दिया है, लेकिन आसपास के गांवों एवं कालोनियों के लोग भी इन गांव में वैक्सीन लगवाने आ रहे है। इस कारण इन गांवों में डिस्पेंरी में आने वाले समस्त लोगों को वैक्सीन नहीं लग पाती है।
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झाड़ौदा कलां में वैक्सीन लगने की शुरुआत नहीं हुई है, जबकि इस गांव में करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव निवासी एडवोकेट ईश्वर सिंह डागर बताते है कि कोरोना महामारी से भयभीत है और वे वैक्सीन लगने की शुरुआत होने का इंतजार कर रहे है।

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वहीं सिरसपुर गांव के निवासी प्रवीन राणा ने बताया कि उनके गांव में वैक्सीनेशन सेंटर नहीं है। इस कारण ग्रामीणों को वैक्सीन लगवाने के लिए आसपास के गांव बादली, शाहबाद, कादीपुर आदि में जाना पड़ता है। कई बार तो आसपास गांव में भी वैक्सीन नहीं लग पाती है। गोयला खुर्द गांव में वैक्सीन लगाने की आरंभ नहीं हुई है। ग्रामीन पवन नलवाटी ने बताया कि ग्रामीण द्वारका में वैक्सीन लगवाने जाते है, लेकिन गांव के अधिकतर लोग वैक्सीन से वंचित हैं।

मुबारक पुर गांव निवासी बिजेंद्र सिंह बताते है कि उनके गांव के लोग वैक्सीन लगवाने के लिए काफी सक्रिय हैं, परंतु कई बार वैक्सीन नहीं होती और बीच-बीच में छुट्टी के दिन काम ही नहीं होता है। इस कारण समस्त ग्रामीणों को वैक्सीन नहीं लग पा रही है।

कई गांवों के ग्रामीणों में वैक्सीनेशन को लेकर संशय
नई दिल्ली। ककरौला एवं नवादा गांव के ग्रामीणों में वैक्सीन को लेकर कई प्रकार के संदेह है। उनमें वैक्सीन को लेकर डर का माहौल बना हुआ है। ककरौला गांव के नीरज का कहना है कि वैक्सीनेशन के कई दिन बाद उनके गांव के चार-पांच लोगों तबीयत बिगड़ और उनकी मौत हो गई। इस कारण ग्रामीण वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते। वे कोरोना से बचाव के लिए काफी अधिक सावधानी बरत रहे है। नवादा गांव में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण पुलकित ने बताया कि लोग वैक्सीनेशन के लिए आगे आने में हिचक रहे है। दरअसल उनके गांव में वैक्सीनेशन के बाद कुछ लोगों की मौत हो हुई हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस और उसकी वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में सवालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। इसके लिए सरकार और प्रशासन को लोगों के बीच और अधिक जागरूकता लाने की आवश्यकता है।
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