एक विधवा याचिकाकर्ता उषा देवी को राहत देते हुए रोहिणी कोर्ट की न्यायाधीश साक्षी जायसवाल ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी कर की है। विधवा के पिता सुखबीर सिंह, भाई जितेंद्र व अजय और भाभी कमलेश 16 जुलाई की अगली सुनवाई तक विधवा और उनके 18 वर्षीय बेटे अर्पित पाल को घर से निकालने से रोक दिया गया है। कोर्ट ने समन और नोटिस जारी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।
भाई पर 10 लाख रुपये उगाही का आरोप
2016 में पति दिनेश के निधन के बाद उषा देवी अपने बेटे के साथ मायके आईं। इसके कुछ समय बाद परिवार वालों ने उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से परेशान करना शुरू कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि भाई जितेंद्र ने उनसे 10 लाख रुपये की उगाही की। इसके बाद तीन लाख रुपये और देने का दबाव बना रहे थे।
पंचायत में भाई ने पैसे लौटाने का वादा किया, लेकिन नहीं दिया। वहीं, मार्च में परिवार ने महिला की मंजिल की बिजली काट दी और शौचालय का स्लैब तोड़ दिया। उन्होंने 15 दिनों में घर नहीं छोड़ने पर हत्या की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। पुलिस में शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर पीड़िता 28 मार्च को कोर्ट पहुंची।
अल-फलाह ग्रुप के अध्यक्ष को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत
साकेत कोर्ट ने शनिवार को अल-फलाह ग्रुप के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 17 अप्रैल तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह मामला 45 करोड़ रुपये की जमीन की धोखाधड़ी से अधिग्रहण से जुड़ा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान के सामने शनिवार को सिद्दीकी पेश किया गया। यह पेशी 25 मार्च को उनके 10 दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत खत्म होने के बाद हुई।
ईडी ने 24 मार्च को सिद्दीकी को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दूसरे मामले में गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला कि जमीन की धोखाधड़ी से अधिग्रहण के लिए जाली दस्तावेज बनाए गए थे। तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन के डायरेक्टर और मुख्य शेयरधारक सिद्दीकी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर यह साजिश रची थी।
ईडी के अनुसार, राजधानी के मदनपुर खादर गांव में खसरा नंबर 792 की जमीन कीमत 45 करोड़ रुपये है। लेकिन, दस्तावेज में भुगतान की राशि केवल 75 लाख रुपये दिखाई गई थी। इससे पहले नवंबर में ईडी ने सिद्दीकी को पहले ही एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। यह मामला अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा था। पांच फरवरी को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने सिद्दीकी को उनकी निजी यूनिवर्सिटी में अनियमितताओं और जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार किया था।