इंस्टिट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) के डॉक्टर एसके सरीन ने अमर उजाला से कहा कि इंग्लैंड की एक संस्था के नये रिसर्च में प्लाज्मा थेरेपी की उपयोगिता प्रमाणित हो गई है। कोरोना मरीजों के उपचार का उनका अनुभव भी इसे काफी उपयोगी बता रहा है। इसलिए वे कोरोना से स्वस्थ हुए लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में सामने आएं और प्लाज्मा दान करें ताकि अन्य कोरोना संक्रमित लोगों की जान बचायी जा सके।
दूसरे फेज में कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद आईएलबीएस संस्थान रोजाना 35 से 40 लोगों को प्लाज्मा उपलब्ध करा रहा है। लेकिन प्लाज्मा की भारी मांग को देखते हुए प्लाज्मा चाहने वाले हर व्यक्ति से एक डोनर लाने की अपील की जा रही है। अस्पताल से हफ्ते के सातों दिन सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे के बीच प्लाज्मा के लिए संपर्क किया जा सकता है।
पूरी जांच कर रहा अस्पताल
इस बार कोरोना संक्रमण में एक बात देखने को मिल रही है कि जो लोग कोरोना से स्वस्थ भी हो जा रहे हैं, यह आवश्यक नहीं कि सभी के रक्त में उचित मात्रा में एंटीबॉडी बन ही जाएं। लोग बिना उचित मात्रा में एंटीबॉडी बने भी स्वस्थ हो रहे हैं तो कुछ मरीजों में कुछ समय के बाद ही एंटीबॉडी की मात्रा बेहद कम हो जा रही है। जिन मरीजों में एंटीबॉडी की मात्रा कम हो जा रही है, उनके दोबारा कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की आशंका बनी रहती है।
इस नई परेशानी को देखते हुए ही आईएलबीएस किसी व्यक्ति से प्लाज्मा लेने के पहले उसमें एंटीबॉडी होने की पूरी जांच कर रहा है। अगर किसी व्यक्ति के रक्त में उचित मात्रा में एंटीबॉडी नहीं बन रही है तो उसका प्लाज्मा एकत्र नहीं किया जा रहा है।
ज्यादा संख्या में लोग प्लाज्मा डोनेट करने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं, इससे पर्याप्त मात्रा में लोगों को प्लाज्मा नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में सामने आकर प्लाज्मा डोनेट करने के लिए अपील कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कर रहे अपील
प्लाज्मा की उपयोगिता को देखते हुए भारी संख्या में लोग प्लाज्मा के लिए अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन प्लाज्मा दान-दाताओं की संख्या इतनी नहीं है कि सभी को प्लाज्मा उपलब्ध कराया जा सके। यही कारण है कि एक तरफ तो अस्पताल प्लाज्मा लेने के लिए अपने साथ एक डोनर लाने के लिए कह रहे हैं, तो मरीजों के परिवार के लोग सोशल मीडिया से लोगों से डोनर के लिए अपील कर रहे हैं।