अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सीय निदेशक डॉ. एस के कटोच का कहना है कि बच्चे के पिता के आरोप गलत हैं। उन्होंने न सिर्फ बच्चे के इलाज में लापरवाही बरती, बल्कि अस्पताल में भर्ती होते समय भी पेड वार्ड का चयन किया।
सीएम राहत कोष से मिले बजट में बची धनराशि सरकार को वापस चली गई थी। उसके बाद से लेकर अभी तक अस्पताल ने बच्चे की पूरी चिकित्सकीय जरूरतों को पूरा किया है।
लेकिन बीते आठ अक्तूबर को बिल के नौ लाख सत्तर हजार से भी ज्यादा हो जाने पर जब बच्चे के पिता ने असमर्थता जताई, तब से अस्पताल बच्चे को जनरल वार्ड में शिफ्ट कर निशुल्क इलाज कर रहा है और जब तक बच्चे को जरूरत रहेगी अस्पताल निशुल्क इलाज करता रहेगा।