न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे पर मानसिक दबाव बहुत ज्यादा होता है। परिवार को बचाने की चाह और बाहर निकाले जाने का डर बच्चे को सच बोलने से रोक सकता है। इसलिए सिर्फ इस आधार पर कि पीड़ित या गवाह बाद में अपने बयान से मुकर गए, आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।
12 साल की बच्ची को पिता आधी रात बनाया था हवस का शिकार
मामला मार्च 2016 का है, जब 12 साल से कम उम्र की बच्ची ने आरोप लगाया था कि आधी रात को सोते समय उसके सौतेले पिता ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। बाद में उसने अपनी मां को बताया और शिकायत दर्ज कराई गई। हालांकि, ट्रायल के दौरान पीड़िता, उसकी मां और बहन अपने बयानों से मुकर गईं।
पुलिस पर पीड़ित बच्चों को तत्काल संरक्षण और शेल्टर की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी
हाई कोर्ट ने कहा कि बच्चे की बाद की गवाही को अलग-थलग नहीं देखा जा सकता और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ मिलाकर उसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि पॉक्सो कानून के तहत पुलिस और विशेष इकाइयों पर पीड़ित बच्चों को तत्काल संरक्षण और शेल्टर की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी है।