हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस और प्रतिवादी को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट समलैंगिक जोड़ों पर घरेलू उत्पीड़न की धारा की वैधता पर विचार करेगा। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने सिम्मी पटवा द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया। इसमें दावा किया गया है कि यह प्रावधान समलैंगिक जोड़ों पर लागू नहीं हो सकता। याचिकाकर्ता का कहना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए को लागू करने की प्राथमिक शर्त यह है कि शिकायतकर्ता एक पत्नी होनी चाहिए और आरोपी व्यक्ति एक पति होना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि इस अपराध को लागू करने के लिए व्यक्तियों का विपरीत लिंग के रिश्ते में होना आवश्यक है। सिम्मी पटवा ने अपने पूर्व साथी द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई एक प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की है। पटवा का दावा है कि वह जैविक रूप से महिला हैं और जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित हैं। याचिका के अनुसार, पटवा ने अपने पूर्व साथी के आग्रह पर एक प्रतीकात्मक विवाह करने के लिए सहमति दी थी और इसके बाद वे एक साथ रहने लगे। याचिका में दावा किया गया है कि पटवा को उनकी पूर्व साथी द्वारा गंभीर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, जिसमें सर्जरी के लिए ब्लैकमेल करना भी शामिल था।
याचिका में यह भी कहा गया है कि पटवा को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से एक प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है, जो प्रमाणित करता है कि वह आनुवंशिक रूप से महिला हैं। चूंकि इस मामले में कोई पंजीकृत विवाह नहीं है, इसलिए यह कानून की दृष्टि में अमान्य है और बिना पंजीकृत विवाह के एक ही लिंग के दो व्यक्तियों के बीच कोई वैवाहिक अधिकार उत्पन्न नहीं होंगे। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता को याचिका का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी।