हाईकोर्ट ने एक मृतका की फोटो हाथरस पीड़िता के तौर पर सोशल मीडिया पर वारयल होने के मामले में केन्द्र सरकार से जवाब मांगा है। इसके साथ ही पीठ ने केन्द्र से पूछा कि मामले में दी गई शिकायत पर अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर के लिए सूचीबद्ध की गई है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लिया कि इस संबंध में याचिकाकर्ता ने 17 अक्टूबर को केंद्र के समक्ष प्रतिवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीठ ने नाराजगती जताते हुए कहा कि पिछली सुनवाई में केन्द्र सरकार को निर्देश दिया गया था कि 3 दिन में इस शिकायत पर कार्रवाई करें, लेकिन फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
वहीं केंद्र सरकार की तरफ से पेश स्थायी वकील मोनिका अरोड़ा ने दलील दी कि शिकायतकर्ता की तरफ से यूआरएल और वेब पेज, आधार कार्ड व एफआइआर से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जबकि वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ से कहा कि 17 अक्टूबर को दिए गए प्रतिवेदन के दौरान उक्त जानकारियां उपलब्ध कराई गई थीं।
उन्होंने पीठ से कहा कि 13 अक्टूबर को अदालत ने निर्देश दिया था कि प्रतिवदेन देने के 3 दिन के भीतर कार्रवाई की जाए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने शिकायकर्ता के वकील को निर्देश दिया कि केन्द्र सरकार की वकील मोनिका अरोड़ा को प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही मोनिका अरोड़ा से कहा कि यह गंभीर मामला है, ऐसे में इस पर तत्काल कुछ करें। इसके साथ ही पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार को एक सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया है।
याचिका में शिकायतकर्ता का दावा है कि उसकी मृत पत्नी की तस्वीर को हाथरस दुष्कर्म पीड़िता की तस्वीर बताकर फेसबुक, ट्विटर और गूगल पर प्रसारित किया जा रहा है। इसपर पीठ ने कहा थी कि अगर याची का दावा सही है तो सरकार को संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफार्म को निर्देश जारी करने चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना था कि दुष्कर्म पीड़िता की तस्वीर को वायरल करना अपराध है, जिसके तहत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जानी चाहिए।