अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखते हुए न्यायालय का विचार है कि एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा को सर्वोच्च वेदी पर रखा गया है और इसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक नागरिक के जीवन के अधिकार के समान माना गया है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की रक्षा करने की अनिवार्य आवश्यकता है। वादी समाज का एक सम्मानित सदस्य है और केंद्रीय मंत्रालय का सम्मानित सदस्य है।
अदालत ने माना कि ईरानी ने प्रथम दृष्टया मामला बनाया है और अंतरिम राहत देने के लिए सुविधा का संतुलन उनके पक्ष में और प्रतिवादी नेताओं के खिलाफ है। अदालत ने कहा कि वे इस बात से संतुष्ट हैं कि अगर मानहानि के आरोपों और इससे जुड़ी सामग्री को इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रहने दिया जाता है, तो वादी को नुकसान की सीमा बहुत अधिक हो सकती है और वादी और उसकी प्रतिष्ठा के लिए हानिकारक हो सकती है।
ईरानी ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ दायर किया है मानहानि का मामला
ईरानी ने कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए सभी आरोपों को झूठे और मानहानि पूर्ण बताते हुए मुकदमा दायर किया है। उन्होंने अदालत से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ट्विटर, यूट्यूब और मेटा को प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो और उसी से जुड़ी सामग्री को हटाने के लिए एकतरफा अंतरिम अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की है।