न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि यदि यह इतना हानिकारक है तो इसका उपयोग न करें। क्या इसका उपयोग करना आपके लिए अनिवार्य है। डीपसीक के खिलाफ जनहित याचिका में प्लेटफॉर्म की गोपनीयता और सुरक्षा के संबंध में चिंता जताई गई है और ऐसे एआई उपकरणों तक पहुंच को अवरुद्ध करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने के निर्देश देने की प्रार्थना की गई है। 12 फरवरी को अदालत ने केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील से मामले में निर्देश मांगने को कहा था।
इसे 20 फरवरी को फिर से सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन समय की कमी के कारण इसे नहीं लिया जा सका, इसलिए अगली तारीख 16 अप्रैल दी गई थी लेकिन याचिकाकर्ता ने अपने मामले की प्राथमिकता से सुनवाई की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया। जिस पर अदालत ने कहा कि मामले में कोई तात्कालिकता नहीं है क्योंकि डीपसीक जैसे कई प्लेटफार्म भारत में लंबे समय से उपलब्ध है। अदालत ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसकी सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जानी चाहिए।