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Delhi: हाईकोर्ट ने कहा- GST के तहत मुनाफाखोरी विरोधी कानून वैध, उपभोक्ता कल्याण को बढ़ावा देता है यह अधिनियम

Tue, 30 Jan 2024 04:59 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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हाईकोर्ट ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम के तहत मुनाफाखोरी विरोधी प्रावधानों और राष्ट्रीय मुनाफाखोरी विरोधी प्राधिकरण (एनएए) की स्थापना की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि यह कानून उपभोक्ता कल्याण को बढ़ावा देता है।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा की खंडपीठ ने केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (सीजीएसटी अधिनियम) की धारा 171 के साथ-साथ केंद्रीय माल के नियम 122, 124, 126, 127, 129, 133 और 134 और सेवा कर नियम, 2017 (सीजीएसटी नियम) को बरकरार रखा है। धारा 171 में कहा गया है कि वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति पर कर की दर में कटौती का लाभ कीमत में आनुपातिक कमी के रूप में उपभोक्ताओं तक भी पहुचाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि यह सार्वजनिक हित में शुरू किया गया एक उपभोक्ता कल्याण उपाय है।

अदालत ने कहा कि यह धारा एनएए की स्थापना का भी प्रावधान करता है और इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के साथ-साथ कार्यप्रणाली और प्रक्रिया और कर्तव्यों को निर्धारित करने की शक्ति प्रदान करता है। पीठ ने 140 से अधिक पेज के अपने फैसले में कहा कि धारा 171 संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी)(किसी भी व्यापार या पेशे को करने का अधिकार) का उल्लंघन नहीं करती है, क्योंकि यह मूल्य निर्धारण तंत्र नहीं है। करो में कटौती के माध्यम से उपभोक्ताओं के पक्ष में छोड़ी गई धनराशि पर आपूर्तिकर्ताओं का कोई अधिकार नहीं है।
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कोर्ट ने आतिथ्य, फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) से लेकर रियल एस्टेट तक विविध व्यवसाय चलाने वाली 100 से अधिक कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन कंपनियों में फिलिप्स, नेस्ले इंडिया, जिलेट, पतंजलि, व्हर्लपूल, एमार एमजीएफ आदि शामिल थीं। न्यायालय ने कहा कि यद्यपि यह संभव है कि मुनाफाखोरी-विरोधी तंत्र के तहत शक्ति के मनमाने ढंग से प्रयोग के मामले हो सकते हैं, लेकिन इसका उपाय गुण-दोष के आधार पर ऐसे आदेशों को रद्द करना है, प्रावधान को ही खत्म कर देना नहीं। 

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व्हाट्सएप, टेलीग्राम धोखाधड़ी वाले अकाउंट को ब्लॉक करें : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप और टेलीग्राम को उन सभी समूहों/सामुदायिक समूहों और अकाउंट/चैनलों को हटाने का आदेश दिया है जो उद्यम पूंजी फर्म सिकोइया कैपिटल के ट्रेडमार्क का दुरुपयोग करके लोगों को धोखा दे रहे हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया मुख्यालय वाला सिकोइया कैपिटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्रिप्टोकरेंसी, हेल्थकेयर, फिनटेक, ई-कॉमर्स, एडटेक और टेलीकॉम जैसे विभिन्न क्षेत्रों में निवेश सेवाएं प्रदान करता है। जस्टिस संजीव नरूला ने आदेश में कहा इन अकाउंट और चैनलों का इस्तेमाल लोगों को धोखा देने के लिए किया जा रहा है। यदि आदेश पारित नहीं किया गया तो सिकोइया को अपूरणीय क्षति होगी। अदालत ने मेटा प्लेटफॉर्म इंक को वादी (सिकोइया कैपिटल) की ओर से उपलब्ध कराए गए मोबाइल नंबरों के व्हाट्सएप अकाउंट को हटाने, ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। मेटा को जॉन एनालिस्ट ग्रुप-303 या इसके ग्रुप एडमिन के फोन नंबरों से बनाए गए, संचालित किए जाने वाले अन्य किसी ग्रुप, सामुदायिक ग्रुप को भी हटाना पड़ेगा जो वादी के ट्रेडमार्क का दुरुपयोग कर रहे हैं।

ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत रिक्त सीटों को अगले साल समायोजित किया जाए : कोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी साल ईडब्ल्यूएस या डीजी कोटे के तहत 25 फीसदी आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों से निजी स्कूलों का सीट नहीं भरी जाती है तो रिक्त सीटों को अगले साल सामंजस्य करने से कानून रोकता नहीं है। ऐसा करना शिक्षा का अधिकार अधिनियम या किसी अन्य कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता है।

न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने कहा कि 25 फीसदी सीटों पर ईडब्ल्यूएस/डीजी श्रेणी के छात्रों का प्रति वर्ष नामांकन करना सभी निजी स्कूलों का वैधानिक दायित्व है। यह आरटीई अधिनियम की धारा 2 (एन) (1) के अंतर्गत आता है। यदि कोई स्कूल निर्धारित संख्या में छात्रों का नामांकन नहीं करता है तो उससे अगले साल उच्च कक्षा में घाटे को पूरा करने का निर्देश देने में कुछ गैर कानूनी नहीं है।
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