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Delhi : हाईकोर्ट ने कहा- पुरुषों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है धारा 376 का इस्तेमाल, एक प्राथमिकी रद्द

Sat, 07 Dec 2024 03:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

अदालत ने कहा, यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे एक निर्दोष व्यक्ति को दंड प्रावधान के दुरुपयोग के कारण अनुचित कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
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Delhi High Court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने धारा 376 के दुरुपयोग का हवाला देते हुए एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा, यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे एक निर्दोष व्यक्ति को दंड प्रावधान के दुरुपयोग के कारण अनुचित कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

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न्यायमूर्ति चंद्राधारी सिंह ने कहा यह सच है कि जिस प्रावधान के तहत एफआईआर दर्ज की गई है वह महिलाओं के खिलाफ सबसे जघन्य अपराधों में से एक है। हालांकि, यह भी एक स्थापित तथ्य है कि कुछ लोग इसे अपने पुरुष समकक्ष को अनावश्यक रूप से परेशान करने के लिए एक हथियार के रूप में उपयोग करते हैं।

कोर्ट ने सितंबर 2021 में उस व्यक्ति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसने शिकायतकर्ता का यौन उत्पीड़न किया था। उन्होंने इस आधार पर एफआईआर को रद्द करने की मांग की कि वह और शिकायतकर्ता रिश्ते में थे और सहमति से संबंध स्थापित किए थे। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए उसके बयान से पता चला कि शादी के झूठे बहाने पर उसके साथ संबंध बनाने में कोई आरोप नहीं थे।
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इस तर्क के समर्थन में उस व्यक्ति ने व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट और ऑडियो रिकॉर्डिंग की ट्रांसक्रिप्ट को रिकॉर्ड पर रखा। हालाँकि, अभियोजन पक्ष ने कहा कि एफआईआर धारा 376 के तहत दर्ज की गई थी और चूंकि यह एक जघन्य अपराध है, इसलिए इसे रद्द करने का कोई आधार नहीं है।

याचिका को स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि व्यक्ति के परिवार की आपत्तियों के बावजूद वह शिकायतकर्ता से शादी करने के लिए तैयार था, जिसने बाद में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध बना लिया। अदालत ने कहा कि पक्षों के बीच व्हाट्सएप चैट से पता चला है कि पीड़िता ने उस व्यक्ति को कई संदेश भेजे थे और किसी अन्य व्यक्ति से शादी करने के अपने फैसले के बारे में जानकारी दी थी और इस प्रकार एफआईआर एक बाद के विचार के अलावा और कुछ नहीं थी।
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