जस्टिस जी रोहिणी ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट की पहली महिला जस्टिस के रूप में शपथ ग्रहण की। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय की अतिरिक्त न्यायाधीश जी रोहिणी ने दिल्ली हाई कोर्ट में एनवी रमन का स्थान लिया।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से जस्टिस रोहिणी की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने राजनिवास में आयोजित समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता शपथ दिलाई।
विधि संवाददाता के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली जी रोहिणी ने एक पत्रकार से दिल्ली हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस बनने तक अनेक पड़ाव तय किए है।
चार सालों का होगा कार्यकाल
अक्टूबर 1966 में दिल्ली हाईकोर्ट की स्थापना के बाद से अब तक कोई भी महिला जज यहां चीफ जस्टिस नहीं बनी थी। जस्टिस जी रोहिणी की नियुक्ति के साथ ही हाईकोर्ट में महिला जजों की संख्या दस हो गई है।
दरअसल, जस्टिस रमन के सुप्रीम कोर्ट में जज बनने बाद से ही हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का पद खाली था। अब तक जस्टिस बीडी अहमद कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर कार्यभार संभाल रहे थे।
40 जजों वाले दिल्ली हाई कोर्ट में 10वीं महिला जज होंगी और पहली महिला चीफ जस्टिस जी रोहिणी का कार्यकाल चार सालों का होगा।
जानिए कौन हैं जस्टिस जी रोहिणी
दिल्ली हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस जी रोहिणी आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश रह चुकी हैं। साल 2001 में उनकी नियुक्ति आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में अस्थायी जज के तौर पर हुई थी।
जस्टिस रोहिणी ने वर्ष 1976 में साइंस में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद आंध्र विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। साल 1980 में उन्होंने वकालत की शुरुआत की और विधि संवाददाता के रूप में भी काम किया।
आंध्र प्रदेश लॉ जर्नल में विधि विषयों पर रिपोर्टिग करने वाली जस्टिस रोहिणी इस पत्रिका में कार्यकारी संपादक भी रह चुकी है। साल 1995 में उनकी नियुक्ति आंध्र प्रदेश सरकार की अस्थायी वकील के तौर पर हुई थी बाद में साल 2002 में स्थायी कर दिया गया।