फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली: आधी आबादी के लिए सिर्फ 14 समर्पित शौचालय, हाईकोर्ट ने एमसीडी को लगाई फटकार

Thu, 22 Oct 2026 07:48 AM IST
Vijay Singh Pundir गौरव बाजपेई, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अदालत के समक्ष यह गंभीर तथ्य सामने आया कि दिल्ली जैसे महानगर में, जहां की आबादी यानी महिलाएं करोड़ों में है, उनके लिए केवल 14 समर्पित सार्वजनिक शौचालय ही उपलब्ध हैं। इसके अलावा यह शौचालय इनकी पहुंच से काफी दूर भी है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक शौचालयों की दयनीय हालत पर गंभीर चिंता जताते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को आड़े हाथों लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय का अधिकार नागरिकों के जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है, और इस मामले में एमसीडी पूरी तरह विफल साबित हुआ है। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने की।

विज्ञापन


अदालत के समक्ष यह गंभीर तथ्य सामने आया कि दिल्ली जैसे महानगर में, जहां की आबादी यानी महिलाएं करोड़ों में है, उनके लिए केवल 14 समर्पित सार्वजनिक शौचालय ही उपलब्ध हैं। इसके अलावा यह शौचालय इनकी पहुंच से काफी दूर भी है। यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शहर में महिलाओं की बुनियादी स्वच्छता आवश्यकताओं की उपेक्षा की गई है। इसके अलावा, विकल्प के तौर पर जो सार्वजनिक शौचालय मौजूद हैं, उनकी हालत भी अत्यंत खस्ता है, स्वच्छता का अभाव, पानी की कमी, रखरखाव में लापरवाही और सुरक्षा संबंधी चिंताएं आम हैं।

छात्रों के हाथ होगी निरीक्षण की कमान
अदालत ने इस स्थिति से निपटने के लिए अदालत ने एक अनोखा और सख्त कदम उठाया है। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग, जामिया मिलिया इस्लामिया के समाज कार्य विभाग और आदिति महाविद्यालय को निर्देश दिया है कि वे पुरुष और महिला छात्रों की टीमें गठित करें। 
विज्ञापन


रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई 
 छात्रों की ये निरीक्षण रिपोर्टें सीधे एमसीडी के अतिरिक्त आयुक्त को सौंपी जाएंगी। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि किसी क्षेत्र में बार-बार समस्याएं पाई जाती हैं और सुधार नहीं होता, तो संबंधित उपायुक्त और मुख्य अभियंता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने पर विचार किया जाएगा। अदालत ने संबंधित शैक्षणिक संस्थानों और एमसीडी को 2 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है।

अदालत का स्पष्ट संदेश: जवाबदेही तय हो
अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्वच्छता कोई विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी अधिकार है। यह जनहित याचिका जन सेवा वेलफेयर सोसायटी द्वारा दायर की गई थी। अदालत ने एमसीडी से यह भी पूछा है कि वह सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव के लिए आवंटित धनराशि का किस प्रकार उपयोग कर रहा है और ठेकेदारों की जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जा रही है। इससे पहले दिल्ली सरकार ने बाजारों, पार्कों और सड़क किनारे महिलाओं के लिए शौचालय ब्लॉक बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित करने और सीसीटीवी लगाने की योजना की घोषणा की थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है।

शौचालयों की हालत बदहाल, पास से गुजरने से भी गुरेज कर रहे लोग
अमर उजाला की टीम ने लुटियंस दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में शौचालयों की स्थिति की पड़ताल की। इस दौरान शौचालयों की हालत इतनी खस्ताहाल दिखी कि लोग सार्वजनिक शौचालयों के पास से गुजरने में भी गुरेज कर रहे थे। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें