दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में वायु प्रदूषण के आधार पर 15 लाख रुपए का मुआवजा मांगने वाली याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने मुआवजे की मांग करने वाले विधि छात्र शिवम पांडे से कहा कि आपने अपने निजी नुकसान को लेकर किसी अस्पताल या डाक्टर की कोई रिपोर्ट नहीं दी है। आपने सामान्य तौर कर कह दिया कि प्रदूषण के कारण नुकसान हुआ है। अपने पक्ष में तथ्य पेश नहीं किया है। अदालत ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने इसके साथ ही मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि एक अदालत गरिमामय जगह होता है। यह जगह ऐसी नहीं है कि आप याचिका अपने बायोडाटा या रिज्यूम में बढ़ोतरी के लिए उसका उसका उपयोग करें। अगली बार से आप गंभीर मुद्दा को लेकर याचिका दाखिल करें तो आपका स्वागत है।
विधि छात्र ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसी तमाम रिपोर्ट हैं जो बताती हैं कि वायु प्रदूषण के कारण किसी व्यक्ति की जीवन क्षमता लगभग पांच से नौ साल तक कम हो जाती है। याचिका में कहा गया था कि वायु प्रदूषण कई बीमारियों की जड़ है और यह फेफड़ों की गंभीर बीमारी भी पैदा कर सकता है।