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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने जापानी कंपनी की अपील ठुकराई

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- केंचुआ (नेमाटोड) की सूंघने की क्षमता पर आधारित तरीके को डायग्नोस्टिक प्रक्रिया माना
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जापानी कंपनी हिरोत्सु बायो साइंस इंक की एक महत्वाकांक्षी पेटेंट याचिका खारिज की है। कंपनी ने कैंसर का पता लगाने के लिए नेमाटोड (केंचुआ) कीड़े की सूंघने की क्षमता पर आधारित एक इन विट्रो (शरीर के बाहर) तरीके को पेटेंट कराने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे भारतीय पेटेंट एक्ट की धारा 3(आई) के तहत गैर-पेटेंटेबल डायग्नोस्टिक विधि करार दिया।
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न्यायमूर्ति तेजस कारिया की एकल पीठ ने कंपनी की अपील खारिज करते हुए पेटेंट कार्यालय के अगस्त 2023 के आदेश को बरकरार रखा। कंपनी का दावा था कि यह तरीका केवल कैंसर की प्रारंभिक जांच (स्क्रीनिंग) के लिए है, जिसमें मानव मूत्र, कोशिकाओं या ऊतकों जैसे नमूनों में कैंसर से जुड़ी विशेष गंध की ओर कीड़े आकर्षित होते हैं। इससे कई प्रकार के कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है। कंपनी ने तर्क दिया कि यह विधि पूरी तरह से शरीर के बाहर काम करती है और इसमें चिकित्सकीय निर्णय या क्लिनिकल जजमेंट शामिल नहीं होता, इसलिए इसे डायग्नोसिस नहीं माना जा सकता।
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