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दिल्ली हाईकोर्ट: एसीपी की शिकायत पर दर्ज केस में महिला को नहीं मिली राहत, अब 27 अक्तूबर को होगी सुनवाई

Fri, 16 Oct 2026 07:30 PM IST
Rahul Kumar Tiwari पीटीआई, नई दिल्ली

सार

एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच पर रोक लगाने से दिल्ली हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया। अदालत अब 27 अक्तूबर को मामले की सुनवाई करेगी।
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जातिसूचक मामले में कोर्ट का जांच पर रोक से इनकार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक महिला पत्रकार की उस याचिका पर तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया, जिसमें पुलिस अधिकारी की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मामले में जांच पर रोक लगाने की मांग की गई थी। पुलिस अधिकारी ने आरोप लगाया है कि इस महीने की शुरुआत में जंतर-मंतर के पास एक प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी की गई और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।
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न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने समय की कमी का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि दशहरा अवकाश के बाद इस मामले की सुनवाई होगी। दिल्ली हाईकोर्ट में 19 अक्तूबर से 26 अक्तूबर तक अवकाश रहेगा।
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इससे पहले, महिला पत्रकार ने सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कर रही है। महिला पत्रकार के वकील ने अदालत से प्राथमिकी के मामले में जांच पर रोक लगाने का अनुरोध किया। इस पर न्यायमूर्ति ने कहा, 'नहीं, इस तरह नहीं। दूसरे पक्ष को सुने बिना मैं कोई आदेश पारित नहीं कर सकती।'

न्यायाधीश ने कहा, 'मैं इस तरह कोई आदेश पारित नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता के वकील की ओर से जताई गई तात्कालिकता को देखते हुए मामले को 27 अक्तूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।' महिला पत्रकार के वकील ने कहा कि यह ऐसा मामला है, जिसमें अदालत को उसी दिन प्राथमिकी की जांच पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश देना चाहिए था।

उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने महिला पत्रकार के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के वकील को हाईकोर्ट में यह आश्वासन देना चाहिए कि महिला पत्रकार के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

वकील ने आरोप लगाया कि एसीपी की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी का उद्देश्य महिला पत्रकार को उनके खिलाफ दर्ज शिकायत पर आगे कार्रवाई करने से रोकने के लिए डराना था। महिला पत्रकार की ओर से यह याचिका अधिवक्ता साइमन फारूकी ने दायर की है। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही महिला पत्रकार को संरक्षण दे चुका है।

अदालत ने महिला पत्रकार के एक पुरुष सहकर्मी की उस याचिका पर सुनवाई भी टाल दी, जिसमें उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई है। दिल्ली पुलिस ने एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर स्वतंत्र महिला पत्रकार और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। भगत नई दिल्ली जिले के कनॉट प्लेस उपमंडल में तैनात हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां की गईं, उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और उनकी मानहानि की गई।

प्राथमिकी के अनुसार, एसीपी भगत 3 अक्तूबर को जंतर-मंतर के पास बूटा सिंह गोलचक्कर पर कानून-व्यवस्था की ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर महिला पत्रकार को सार्वजनिक रूप से उनकी मेघ/मेघवाल जाति के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करते और एसीपी के पद पर उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए सुना शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने इन टिप्पणियों को नजरअंदाज किया और अपनी आधिकारिक ड्यूटी जारी रखी।
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हालांकि, उसी दिन दोपहर करीब तीन बजे महिला पत्रकार ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को संभालने और हिरासत में लेने की कार्रवाई के दौरान उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। प्राथमिकी के अनुसार, महिला पत्रकार ने अपने सहकर्मियों के साथ बार-बार उनका सामना किया, जिससे उनके आधिकारिक काम में बाधा पहुंची।

भगत ने यह भी आरोप लगाया कि महिला पत्रकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कुछ सदस्यों ने सोशल मीडिया मंच एक्स और इंस्टाग्राम पर पोस्ट और रील साझा कीं, जिनमें उन पर आरोप लगाए गए। इन सदस्यों में अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह शामिल हैं।
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