अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
पटियाला हाउस स्थित विशेष एनआईए अदालत ने 2011 दिल्ली हाईकोर्ट बम धमाके मामले में अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) के डिजिटल विश्लेषक इमैनुअल व्लास्को का बयान दर्ज किया है। व्लास्को एफबीआई की कंप्यूटर एनालिसिस रिस्पॉन्स टीम से जुड़े हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ स्थित एक साइबर कैफे से जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों का फॉरेंसिक विश्लेषण किया था। उनका बयान पारस्परिक कानूनी सहायता संधि के तहत अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज किया गया। अदालत में सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष हुई। फिलहाल अदालत आरोपी वसीम अकरम मलिक के खिलाफ अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज कर रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, जब्त डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण भारत में संभव नहीं हो सका था। ऐसे में उन्हें एफबीआई को भेजा गया। इमैनुअल व्लास्को ने इन साक्ष्यों की जांच कर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की, जिसे साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर लिया गया। अदालत ने अब अगली सुनवाई पर फेसबुक कंपनी के एक अधिकारी को अमेरिका से ऑनलाइन पेश होकर बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया है। एनआईए के अनुसार, वसीम अकरम मलिक पर आरोप है कि उसने एक नाबालिग लड़के को दिल्ली हाई कोर्ट ब्लास्ट की जिम्मेदारी लेने वाला ईमेल भेजने के निर्देश दिए थे। यह ईमेल किश्तवाड़ के उसी साइबर कैफे से भेजा गया था। बाद में उस नाबालिग को गिरफ्तार किया गया और किशोर न्याय बोर्ड ने उसे दोषी ठहराया था। उसकी सजा के खिलाफ अपील अभी दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है।