दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित देशद्रोह के मामले में पुलिस को निर्देश दिया है कि वह दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरूल इस्लाम खान के खिलाफ कोई भी कार्रवाई न करे। जफरूल पर सोशल मीडिया पर कथित देशद्रोही और भड़काऊ टिप्पणी करने के चलते देशद्रोह की धारा के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले में अगली सुनवाई 22 जून को होगी। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पुलिस को यह निर्देश दिया। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरूल इस्लाम खान ने इस मामले में वकील वृंदा ग्रोवर के माध्यम से अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।
याचिका में जफरूल की 72 वर्ष की आयु, स्वास्थ्य कारणों और कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर अग्रिम जमानत की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने पुलिस से उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर 22 जून तक स्थिति रिपोर्ट दायर करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही पुलिस को निर्देश दिया कि जब भी उन्हें जांच के संबंध में बुलाया जाए तो उससे पहले नोटिस दिया जाए। कोर्ट ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि 22 जून से पहले जफरूल इस्लाम खान के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए।
12 मई तक जफरुल इस्लाम को जमा कराना था लैपटॉप और मोबाइल
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान को लैपटॉप व मोबाइल जमा कराने कहा था। साइबर सेल ने रविवार को भेजे नोटिस में अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष से कहा है कि वह अपना लैपटॉप व मोबाइल 12 मई तक जमा करा दे, जिनसे सोशल मीडिया पर विवादित टिप्पणी पोस्ट की थी।
जफरुल इस्लाम पर देशद्रोह का मामला दर्ज है। जफरुल ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल कर रखी है। उन्होंने उम्र, अपनी बीमारियों व कोविड-19 को देखते हुए अग्रिम जमानत मांगी है। उनकी अर्जी पर 12 मई को सुनवाई होनी थी, जिसके बाद आज उन्हें 22 जून तक अंतरिम राहत दे दी गई है।