डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत बेहद नाजुक है। महिला ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि एक विशेषज्ञ चिकित्सा समिति गठित की जाए, जो स्पर्म रिट्रीवल (निकासी) और क्रायोप्रिजर्वेशन (जमाकर सुरक्षित रखने) की प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से अंजाम दे सके।
महिला ने अपनी याचिका में 2021 के भारतीय नियमों का जिक्र किया, जिनमें सहायता से प्रजनन के लिए पति-पत्नी दोनों की सहमति जरूरी बताई गई है। लेकिन पति की कोमा जैसी स्थिति में सहमति नहीं ली जा सकती, इसलिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
केरल हाईकोर्ट सुना चुके है ऐसा एक फैसला
इस तरह के मामलों में सहमति, प्रजनन अधिकार और चिकित्सकीय नैतिकता जैसे मुद्दे उठते हैं। हाल ही में केरल हाईकोर्ट ने एक ब्रेन डेड व्यक्ति के स्पर्म को सुरक्षित रखने की अनुमति दी थी, जो इस मामले में संदर्भ बन सकता है।
महिला की याचिका में कहा गया है कि समय रहते कार्रवाई न की गई तो पति की स्थिति बिगड़ने से स्पर्म की व्यवहार्यता खत्म हो सकती है। इसलिए तत्काल विशेषज्ञ समिति गठित कर प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है।