दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी लैब और अस्पतालों में रैपिड एंटीजन टेस्ट की अनुमति देने की प्रक्रिया के लिए आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा एक महीने का समय दिए जाने के फैसले पर नाराजगी जताई। पीठ ने आईसीएमआर और एनएबीएल को कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर निजी प्रयोगशालाओं और अस्पतालों को रैपिड एंटीजन तथा आरटीपीसीआर जांच करने की अनुमति देने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एक पीठ के समक्ष आईसीएमआर और एनसीडीसी ने हलफनामा दायर किया गया। इस पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने निजी लैब और अस्पताल में रैपिड एंटीजन टेस्ट की अनुमति देने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा गया।
इस बीच पीठ ने उनसे पूछा था कि दिल्ली में कितनी प्रयोगशालाओं और निजी अस्पतालों में रैपिड एंटीजन और आरटीपीसीआर परीक्षण हो रहे हैं। साथ ही अदालत ने उनसे सीरो सर्विलांस से जुड़ी जानकारी मांगी थी। पीठ ने रैपिड एंटीजन टेस्ट की मंजूरी प्रक्रिया में लगने वाले एक महीने के समय को बहुत अधिक बताया। पीठ ने कहा इस समयावधि को कम किया जाए, ताकि जल्द से जल्द लोगों के पास कोरोना जांच कराने के ज्यादा विकल्प मौजूद हो सकें।
सुनवाई में दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया कि 18 जून से 15 जुलाई के दौरान 2,81,555 लोगों के रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट किए गए। इनमें से 19,480 संक्रमित पाए गए और उन्हें आवश्यक उपचार मिल रहा है। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील सत्यकाम ने बताया कि शेष 2,62,075 नमूनों की जांच की रिपोर्ट निगेटिव रही। कुल 1,365 लोग ऐसे पाए गए, जिनमें कोई लक्षण नजर नहीं आए। इन लोगों को आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए भेजा गया। इनमें से 243 लोगों में कोविड-19 के संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दी।