राजधानी की जेलों में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामलों को देखते हुए विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार व जेल प्रशासन से जवाब मांगा है। दायर याचिका में तर्क रखा गया है कि जो कैदी जघन्य मामलों में लिप्त नहीं हैं, उन्हें तुंरत अंतरिम जमानत प्रदान की जाए ताकि जेलों में कोरोना वायरस से मुक्त रखा जा सके।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने तीनों पक्षो को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 4 मई तय की है।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने दायर की है। याची के अधिवक्ता अजय वर्मा ने अदालत को बताया कि हालही में तिहाड़ जेल में 190 कैदी व 304 जेल स्टाफकर्मी कोरोना पॉजिटिव आए है।
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर में लोग तेजी से वायरस की चपेट में आ रहे है। ऐसे में जरूरी है कि जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए ताकि जेलों को वायरस से बचाया जाए।
उन्होंने कहा कि पहले भी उच्चाधिकार कमेटी की सिफारिश पर विचराधीन कैदियों को जमानत पर रिहा किया गया था और माहौल सामान्य होने पर सभी ने समर्पण कर दिया। अब फिर वही स्थिति आ गई है और तिहाड़, मंडोली व रोहिणी जेलों में कैदियों की क्षमता करीब 10 हजार है जबकि कैदी 17 हजार से भी ज्यादा है। यही कारण है कि जेलों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है।
उन्होंने कहा कि जेल से उन विचाराधीन कैदियों को जमानत प्रदान की जाए जिनको सात वर्ष तक की कैद व जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा उन कैदियों को भी जमानत प्रदान की जाए जिनकी हालत काफी गंभीर है। याची ने अदालत से आग्रह किया कि पुलिस को भी निर्देश दिया जाए कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए हिसां जैसी वारदात में शामिल न होने वाले लोगों को फिलहाल गिरफ्तार न करे। याची ने कहा कि गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत निर्णय लिया जाए क्योंकि समय कम है।