Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने 37 साल पुरानी रिट याचिका खारिज करते हुए दिल्ली राज्य सहकारी संघ के पूर्व सेल्स क्लर्क की 1989 में हुई सेवा समाप्ति को वैध ठहराया। कोर्ट ने कहा कि 40 हजार की हेराफेरी और 916 रुपये नकदी की कमी जैसे गंभीर आरोप में विश्वास टूटने का मामला बनता है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली राज्य सहकारी संघ लिमिटेड के पूर्व कर्मचारी की 37 साल पुरानी रिट याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति शैल जैन की एकलपीठ ने औद्योगिक अधिकरण के 5 जुलाई 2002 के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कर्मचारी की सेवा समाप्ति को वैध और उचित ठहराया गया था।
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उमा शंकर शर्मा 14 जुलाई 1971 से दारियागंज बिक्री काउंटर पर सेल्स क्लर्क के पद पर कार्यरत थे। उन्हें 12 अप्रैल 1989 को चार्जशीट दी गई थी, जिसमें 1986-1989 के दस्तावेजों में 40 हजार रुपये की हेराफेरी और 916 रुपये की नकदी की कमी का आरोप लगाया गया था।
आंतरिक जांच में पाया गया कि बिक्री, सदस्यता और प्रकाशनों से प्राप्त नकदी राशि लेखों में दर्ज नहीं की गई। घरेलू जांच में आरोप सिद्ध पाए जाने के बाद 1989 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। शर्मा ने औद्योगिक विवाद उठाया, जिस पर औद्योगिक अधिकरण ने जांच को अवैध माना, लेकिन प्रबंधन को साक्ष्य देने की अनुमति दी।
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अधिकरण ने अंततः प्रबंधन के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि कर्मचारी ने खुद लिखित नोटिंग में राशि जमा करने का वादा किया था और चिकित्सा खर्च के लिए धन का उपयोग स्वीकार किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि वित्तीय हेराफेरी जैसे गंभीर आरोप में विश्वास टूटने का मामला बनता है। लंबी सेवा और राशि जमा करने का तर्क यहां राहत नहीं दे सकता।