अदालत का सुझाव : ज्यादा आवाजाही वाले इलाकों से की जाए शुरुआत
अदालत ने एमसीडी को सुझाव दिया कि वह उन क्षेत्रों से शुरुआत करे जहां लोगों की आवाजाही अधिक है। खंडपीठ ने कहा, छोटे क्षेत्र से शुरू करें। कनॉट प्लेस, इंडिया गेट जैसे वार्ड चुनें, जहां ज्यादा ऑफिस हैं। उस वार्ड में सभी कुत्तों की नसबंदी करवाएं। न्यायमूर्ति मेहता ने निजी अनुभव का किया जिक्र, कहा-मेरी मां को तीन बार कुत्तों ने काटा।
डॉग बाइट की घटनाओं पर हाईकोर्ट चिंतित
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दिनेश मेहता ने डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, हम डॉग बाइट का ध्यान रख रहे हैं। हां, वे सबके लिए खतरा हैं। कुत्ते ने मेरी मां को तीन बार काटा है...। कुत्ते काटते हैं...। भगवान करे किसी को न काटें...। रोज कुत्ते काटने की खबरें आती हैं...। मैं इसमें नहीं जाना चाहता कि कुत्ता काटता है या नहीं काटता...।
अगली पीढ़ी के लिए भी कुत्तों को बचाना जरूरी
अदालत ने हालांकि यह भी कहा कि वह कहीं भी डॉग बाइट की घटनाएं नहीं चाहती, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों के लिए कुत्तों को बचाना चाहती है। खंडपीठ ने कहा, हम किसी भी कुत्ते की मौत नहीं चाहते आज से हम नहीं सुनना चाहते कि कुत्ता काटा या नहीं काटा, सबको पता है कि काटता है। जब कुत्ते खत्म होंगे तो मैं रोऊंगा। मैं अभी भी कहता हूं कि 5 प्रतिशत आबादी छोड़ दी जाए, ताकि अगली पीढ़ी कुत्ते को देख सके।
पक्षियों की कमी पर हाईकोर्ट ने पूछा सवाल
अदालत ने दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में पक्षियों की घटती आबादी की ओर भी इशारा किया। खंडपीठ ने कहा, “गौरैया कहां गईं? पूरी दुनिया कुत्तों के पीछे पड़ी है। गौरैया कहां हैं? कौए कहां हैं?” मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।