हाईकोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ सरकार के उस याचिका को खारिज कर दिया कि जिसमें मौत की सजा पाए सोनू सरदार द्वारा राष्ट्रपति और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा उसकी दया याचिका को खारिज करने के निर्णय को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
याचिका में छत्तीसगढ़ सरकार ने सरदार की ओर से दायर याचिका को खारिज करने का आग्रह करते हुए तर्क रखा था कि इस मामले का रिकॉर्ड राज्य में और दोषी भी राज्य में है। हालांकि सरदार के वकील ने कहा कि जो सामग्री है वह केंद्र सरकार के कब्जे में है। न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की खंडपीठ ने कहा याची की याचिका पर सुनवाई इस अदालत के अधिकार क्षेत्र में है।
सरदार को 26-27 नवंबर 2004 की दरम्यानी रात को गांव बैकुंठपुर जिला छत्तीसगढ़ में पांच लोगों की हत्या का दोषी करार दिया गया था। उसे छत्तीसगढ़ में सत्र अदालत ने दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई थी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2010 में उसकी अपील खारिज कर मौत की सजा की पुष्टि की थी।
इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी सजा को बहाल रखा था और वर्ष 2012 में राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की थी। राज्यपाल व राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका को खारिज करने के बाद सरदार ने दिल्ली हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी थी।