धमकी भरे ईमेल के बाद हाई कोर्ट में तुरंत सुनवाई कर रही बेंच ने कार्यवाही रोक दी। बेंच, वकील और पक्षकार कोर्ट रूम से बाहर निकल आए। दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड, कैट एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। करीब तीन घंटे तक चले सघन तलाशी अभियान में कोर्ट के हर कोने, पार्किंग, जज चैंबर, रिकॉर्ड रूम, कैंटीन और टॉयलेट तक की बारीकी से जांच की गई। मेटल डिटेक्टर और अन्य उपकरणों की मदद से पूरे परिसर को खंगाला गया, लेकिन कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। इस दौरान कई बेंच वापस सुनवाई पर नहीं बैठी।
ई-मेल में गंभीर धमकियों का दावा
सोशल मीडिया पर मेल की एक सूचना साझा की जा रही थई जिसमें पवित्र शुक्रवार विस्फोटों के लिए पाकिस्तान और तमिलनाडु की मिलीभगत का दावा किया गया। इसमें कहा गया कि कोर्ट रूम और जजों के चैंबर में रखे तीन बम दोपहर 2 बजे तक फट जाएंगे। ईमेल में यह भी उल्लेख था कि जज चैंबर में रखा एक बम इस्लामिक प्रार्थना के बाद विस्फोट करेगा। धमकी को और गंभीर बनाने के लिए इसमें अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं का इस्तेमाल किया गया। ईमेल में डॉ. शाह फैसल नामक व्यक्ति का जिक्र था, जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जोड़ा गया। इसके अलावा, 1998 के पटना ब्लास्ट जैसी घटना को दोहराने और कुछ राजनीतिक नेताओं से आंतरिक मदद मिलने का भी दावा किया गया। नई दिल्ली के डीसीपी देवेश कुमार महला ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने ईमेल की जांच की और यह फर्जी पाया गया। इसका हाल के हफ्तों में स्कूलों को मिली बम धमकियों से कोई संबंध नहीं है।