दिल्ली हाईकोर्ट ने आज जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से कहा है कि वह 19 सितंबर तक छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर किसी तरह की कोई कार्रवाई न करे। कोर्ट ने यह आदेश 9 फरवरी को जेएनयू में हुए देशद्रोह के मामले में दिया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कन्हैया कुमार पर 19 सितंबर तक ना ही कोई पैनल्टी लगाई जाए और ना ही कोई सजा सुनाई जाए। ऐसा ही आदेश अदालत ने सोमवार को सुनाया था। उसने जेएनयू प्रसाशन को अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराए गए छात्र उमर खालिद व अनिर्बान भट्टाचार्य के खिलाफ अगले आदेश तक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।
वहीं, पूर्व अध्यक्ष कन्हैया व सात अन्य छात्रों की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने यह आदेश उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य की उस याचिका पर दिया है, जिसमें जेएनयू में 9 फरवरी के नारेबाजी मामले में अपील अथॉरिटी के निर्णय को चुनौती दी गई है।
संबंधित अथॉरिटी ने जेएनयू प्रशासन के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित 19 को अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराते हुए उनके निलंबन की सजा को बहाल रखा है। उमर व अनिर्बान भी इन छात्रों में शामिल हैं।
दूसरी तरफ इसी मामले से संबंधित घटनाक्रम में कन्हैया और सात अन्य छात्रों ने भी न्यायमूर्ति बीडी अहमद और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की खंडपीठ के समक्ष याचिका पाकर तुरंत सुनवाई का आग्रह किया।