हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार से पूछा कि जब रैपिड एंटीजन टेस्ट के नतीजे नकारात्मक हैं तो इस टेस्ट को क्यों कराया जा रहा है। पीठ ने इस याचिका पर अगली सुनवाई 4 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की है।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से अनुपालन करे और इस संबंध में अपने मन मुताबिक कार्य नहीं करे। पीठ ने इस बात का भी जिक्र किया कि दिल्ली में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा किए गए सीरो सर्वे (रक्त के नमूनों की जांच) से यह संकेत मिला है कि 22.86 प्रतिशत से अधिक आबादी कोविड-19 से पीड़ित हुई है, जबकि उन्हें यह महसूस नहीं हुआ कि वे संक्रमित हैं। क्योंकि, उनमें शायद इसके लक्षण नहीं थे।
पीठ ने कहा दिल्ली सरकार इस स्थिति में रैपिड एंटीजन टेस्ट के साथ कैसे आगे बढ़ सकती है, जबकि इसकी गलत निगेटिव रिपोर्ट आने की दर बहुत अधिक है। आरटी-पीसीआर जांच कराने की केवल उन्हीं को लोगों को सलाह दी जा रही है, जिनमें संक्रमण के लक्षण दिख रहे हैं। दिल्ली सरकार के वकील सत्यकाम ने पीठ से कहा कि स्वास्थ्य विभाग आईसीएमआर के उन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कर रहा है, जिनमें कहा गया है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट जिन लोगों की निगेटिव आएगी और उनमें इंफ्लुएंजा जैसे लक्षण दिखेंगे, उनकी आरटी-पीसीआर जांच कराई जाए।
आईसीएमआर से डॉ. निवेदिता गुप्ता ने पीठ से कहा कि आईसीएमआर ने कभी नहीं कहा कि रैपिड एंटीजन टेस्ट में निगेटिव रिपोर्ट आने वाले कोविड-19 के गैर लक्षण वाले मरीज को आरटी-पीसीआर जांच नहीं करानी होगी। उसने सिर्फ यह कहा था कि कोविड के लक्षण वाले रैपिड एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आए मरीजों को प्राथमिकता दी जाए। आईसीएमआर की दलील पर गौर करते हुए पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि कोविड-19 की जांच पर आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों का उसे सख्ती से पालन करना होगा।