दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि फरवरी 2020 के दंगों से जुड़े आरोपी कब तक जेल में रहेंगे। जबकि पांच साल बाद भी इस मामले में आरोप तय करने पर बहस अभी तक पूरी नहीं हुई है। न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने यह सवाल तस्लीम अहमद की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस से पूछा। अहमद पर सख्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दंगों में कथित बड़ी साजिश का आरोप है। मामले की सुनवाई नौ जुलाई को जारी रहेगी।
खंडपीठ ने अभियोजन पक्ष से पूछा, पांच साल बीत चुके हैं। आरोप तय करने पर बहस भी पूरी नहीं हुई। इस तरह के मामलों में, 700 गवाहों के साथ, एक व्यक्ति को कितने समय तक जेल में रखा जा सकता है? कोर्ट ने यह सवाल तब उठाया जब आरोपी के वकील महमूद प्राचा ने मामले में कार्यवाही में देरी का मुद्दा उठाया।
प्राचा ने कहा कि वह मामले के गुण-दोष पर तर्क नहीं देंगे, बल्कि मुकदमे में देरी के आधार पर राहत की मांग करेंगे। उन्होंने सह-आरोपियों देवांगना कलिता, आसिफ इकबाल तन्हा और नताशा नरवाल का उदाहरण दिया, जिन्हें 2021 में देरी के आधार पर जमानत दी गई थी।
शादी का वादा कर दुष्कर्म करने वाले की जमानत खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट ने 49 वर्षीय व्यक्ति को 53 वर्षीय महिला के साथ शादी का झूठा वादा करके बलात्कार करने के आरोप में जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यह सुझाव देने के लिए कोई सामग्री नहीं है कि उनका रिश्ता सहमति पर आधारित था और तलाकशुदा महिला को झूठे आश्वासनों के आधार पर गुमराह किया गया प्रतीत होता है।
कोर्ट ने कहा कि महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही अभी बाकी है और रिकॉर्ड में मौजूद व्हाट्सएप चैट, जो प्रथम दृष्टया अपराध की गंभीरता को दर्शाते हैं। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि महिला की मुलाकात आरोपी से एक राइडर्स ग्रुप के माध्यम से हुई, जिसका प्रशासक वह स्वयं था। उसने खुद को नारकोटिक्स विभाग में डीसीपी के रूप में पेश किया। आरोपी ने कथित तौर पर महिला के घर जाकर शादी का झूठा वादा करके उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।
महिला ने जब शादी पर जोर दिया तो आरोपी ने कथित तौर पर व्हाट्सएप के माध्यम से तलाक याचिका की एक प्रति भेजी और आश्वासन दिया कि वह जल्द ही अपनी पत्नी से अलग होकर उससे शादी कर लेगा। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसकी निजी तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी भी दी, जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
आरोपी ने जमानत की मांग करते हुए दावा किया कि रिश्ता सहमति पर आधारित था। कोर्ट ने चार्जशीट की भी जांच की, जिसमें आरोपी और महिला के बीच चैट शामिल थे, जहां उसने खुद को पूर्व नौसेना कप्तान के रूप में पेश किया था, जो बाद में एनएसजी में शामिल हुआ और 2008 के मुंबई हमलों के दौरान टीम का हिस्सा था। उसने आगे दावा किया कि वह वर्तमान में नारकोटिक्स में डीसीपी के रूप में प्रतिनियुक्ति पर है।