वहीं दूसरी ओर न्यायमूर्ति शकधर ने कहा कि इस तरह के मामलों में विचार करने के लिए डीयू व बार काउंसिल ऑफ इंडिया को मौजूदा नियमों पर विचार करना चाहिए। ऐसे छात्रों को 75 फीसदी हाजिरी के लिए बाध्य करना सही नहीं है।
ऐसे छात्रों के नियमों पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। आज तकनीक का जमाना है और कम उपस्थित के मसले को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये या फिर यूट्यूब पर लेक्चर अपलोड कर दूर किया जा सकता है। -एजेंसी