हालांकि, वह जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। उसे 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे की बड़ी साजिश मामले में राहत नहीं मिली है। दंगों में 50 से अधिक लोग मारे गए थेे।
हाईकोर्ट ने शरजील इमाम को दिल्ली में दंगे भड़काने के लिए राजद्रोह और भड़काऊ भाषण देने के मामलों में वैधानिक जमानत दे दी है। हालांकि, वह जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। उसे 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे की बड़ी साजिश मामले में राहत नहीं मिली है। दंगों में 50 से अधिक लोग मारे गए थेे।
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जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जमानत आदेश पारित किया कि इन मामलों में जितनी अधिकतम सजा है, उसका आधे से ज्यादा समय वह जेल में बिता चुका है। उसे 28 जनवरी, 2020 को गिरफ्तार किया गया था।
इमाम का तर्क था, वह सात साल की अधिकतम सजा में से चार साल जेल में काट चुका है, इसलिए वैधानिक जमानत का हकदार है। ट्रायल कोर्ट ने जमानत नहीं दी, तो उसने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आरोप है कि इमाम के भड़काऊ भाषणों से ही दिल्ली में दंगे भड़के थे।
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पूर्वोत्तर को अलग करने की दी थी धमकी
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शरजील इमाम ने 13 दिसंबर, 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया और 16 दिसंबर, 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भड़काऊ भाषण दिया था। इसमें उसने असम और पूर्वोत्तर के शेष हिस्से को देश से अलग करने की धमकी दी थी। निचली अदालत ने 2022 में उसके खिलाफ आरोप तय किए थे।