हाईकोर्ट ने दक्षिण दिल्ली स्थित अमीर खुसरो पार्क के अंदर अवैध निर्माण को हटाने व उसकी मूल हालत में बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पार्क में बने नाइट शेल्टर को तोड़ने पर रोक लगाने से इंकार करते हुए कहा कानून सभी के लिए समान है और किसी को पार्क में रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने कहा राजधानी में कहीं भी अवैध निर्माण नहीं होना चाहिए। दिल्ली के हर नागरिक पर कानून सख्ती से पालन होना चाहिए। पीठ ने कहा मात्र पुरानी संरचनाओं को संरक्षित किया जाएगा, लेकिन वह भी कानून का पालन करते हुए।
अदालत ने गैर-सरकारी संगठन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है। याची ने लोधी रोड़ स्थित अमीर खुसरो पार्क में बने नाइट शेल्टर को हटाने के खिलाफ याचिका दायर की है।
एनजीओ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर संबंधित अधिकारियों ने इस नाइट शेल्टर को तोड़ा है। इस कारण वहां रहने वाले 50-60 बच्चे और लगभग 60 महिलाएं बेघर हो गईं। खंडपीठ ने नाइट शेल्टर को तोड़ने पर रोक लगाने से इंकार करते हुए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी बेघर लोगों को आस-पास स्थित किसी अन्य नाइट शेल्टर में स्थानांतरित किया जाए।
अदालत ने कहा दिल्ली में रहने वाले हर व्यक्ति के सिर पर छत रहनी चाहिए, आप सड़क पर किसी को भी नहीं छोड़ सकते हैं। हाईकोर्ट ने पिछले महीने 12.8 एकड़ के इस ऐतिहासिक पार्क के अंदर और आसपास से अतिक्रमण को हटाने के निर्देश जारी किए थे।