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HIV: दिल्ली में एचआईवी के 60 हजार मरीज, राष्ट्रीय औसत से अधिक है राजधानी में प्रसार दर; पुरुषों की संख्या अधिक

Fri, 02 Jan 2026 02:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

दिल्ली स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 60 हजार लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं।
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राजधानी में एचआईवी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी है। दिल्ली स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 60 हजार लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं। हर साल औसतन करीब तीन हजार नए एचआईवी संक्रमण सामने आ रहे हैं, जबकि वर्ष 2023 में एक हजार से अधिक लोगों की मौत इसके चलते हो चुकी है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग में एचआईवी प्रसार दर 0.31 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक मानी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई का उपयोग, नशे की लत और समय पर जांच न कराना संक्रमण फैलने के प्रमुख कारण हैं। इसके साथ ही सामाजिक डर और भेदभाव के चलते कई लोग अपनी बीमारी छिपा लेते हैं, जिससे इलाज में देरी होती है।

पुरुषों में ज्यादा मामले
आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 36,588 पुरुष और 22,281 महिलाएं एचआईवी संक्रमित हैं। इसके अलावा 1,355 बच्चे भी एचआईवी से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी मजदूरों, ट्रक चालकों, नशा करने वालों और हाई-रिस्क ग्रुप में संक्रमण का खतरा ज्यादा देखा जा रहा है।
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इलाज मौजूद फिर भी कई मरीज बाहर
दिल्ली में एचआईवी मरीजों के लिए 12 एंटीरेट्रोवायरल ट्रीटमेंट सेंटर, 465 इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर और 79 टार्गेटेड इंटरवेंशन प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद रिपोर्ट में सामने आया है कि राजधानी में करीब 70 प्रतिशत ही है। यानी बड़ी संख्या में मरीज अब भी नियमित इलाज से नहीं जुड़ पाए हैं।

गर्भवती महिलाओं पर खास नजर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गर्भवती महिलाओं में समय पर एचआईवी जांच न होने से मां से बच्चे में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में ईएमटीसीटी योजना के तहत सैकड़ों मामलों में इलाज की जरूरत सामने आई है। समय रहते जांच और दवा मिलने से इस संक्रमण को रोका जा सकता है।

गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डॉ. प्रवीन कुमार ने कहा कि एचआईवी अब मौत की बीमारी नहीं है। समय पर जांच और नियमित इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

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