दिल्ली सरकार राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए व्यस्त चौराहों पर एयर ट्रीटमेंट सिस्टम लगाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू में सराय काले खां, आनंद विहार, कश्मीरी गेट, आईटीओ के साथ आईआईटी दिल्ली या एम्स पर हवा को साफ करने वाले सिस्टम (एयर प्यूरिफायर) लगाए जाएंगे।
हवा को साफ करने वाला सिस्टम आईआईटी मुंबई और नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने विकसित किया है। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि वायु प्रदूषण का स्तर सर्दी के मौसम में बढ़ जाता है।
इसका असर दिखने लगा है, जिसे देखते हुए तीन स्तरीय वायु उपचार प्रणाली शुरू करने का फैसला लिया गया है। शुरुआत पांच व्यस्त चौराहों से होगी, जहां एयर प्यूरिफायर लगाए जाएंगे। फिर एक जगह मिस्ट फाउंटेन लगाएंगे। साथ ही वर्चुअल चिमनी भी लगाई जाएगी।
जैन ने बताया कि हवा को साफ करने वाला उपकरण मॉड्यूलर है, जिसे जगह के हिसाब से छोटा-बड़ा बनाया जा सकता है। वहीं मिस्ट फाउंटेन में पानी ऊंचाई तक उठता है जो हवा में घुले धूल के कण को रोकता है।
नीरी के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार ने शुक्रवार को प्रदूषण को लेकर गठित दिल्ली सरकार के टास्क फोर्स से मुलाकात करके रिसर्च एंड डिजाइन में सहयोग की बात कही। इसे सरकार ने स्वीकार किया है।
सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली में 10 हजार टन कूड़ा निकलता है, जिसमें 5000 टन इधर-उधर साफ हो पाता है या अन्य काम में इस्तेमाल होता है। बाकी 50 फीसदी कूड़ा लैंडफिल साइट पर जाता है।
एयर प्यूरिफायर का उपयोग
- फोटो : अनिल कुमार
ऐसे में राजघाट पॉवर प्लांट को जल्द से जल्द कूड़े का इस्तेमाल करके बिजली बनाने वाले प्लांट में तब्दील करने की तैयारी सरकार ने की है। इसके साथ ही जहां-जहां अंधेरा रहता है, वहां लाइट्स लगाने का काम भी शुरू किया गया है।
एयर प्यूरिफायर कार्बन-मोनोऑक्साइड, नाट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रो कर्बन को कम करता है। इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड और धूल के कण को 20-30 मीटर के दायरे में 40-60 फीसदी तक कम करने की क्षमता है। यह आसपास की हवा को प्रदूषण वाली हवा में मिलाने के लिए एक बड़े पंखे के तौर पर काम करता है।
ट्रैफिक चौराहे पर मिस्ट फाउंटेन लगाने पर धूल के कण कम होंगे। इसके अलावा मिस्ट जनरेटर या मिस्ट फाउंटेन का इस्तेमाल सड़क डिवाइडर या फुटपाथ को धोने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
सम-विषम फार्मूले से ज्यादा जरूरी अतिक्रमण मुक्त बस लेन
- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली
दिल्ली में इस बार सर्दी के दौरान प्रदूषण कम करने केलिए सम-विषम फार्मूला लागू करने को लेकर सरकार अभी कुछ साफ नहीं कह रही है। शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन से जब इस विषय में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा सम-विषय से ज्यादा जरूरी बस लेन को अतिक्रमण मुक्त करना है।
सत्येंद्र जैन ने कहा बसें बायीं तरफ की पहली लेन में चलनी चाहिए लेकिन दूसरी या तीसरी लेन में चलती है। पहली लेन पर वाहन पार्किंग या अन्य तरह के कब्जे हैं। हमारी कोशिश है कि उसे ठीक किया जाए। लोग सड़क को भी अपनी जमीन समझ लेते हैं। ऐसा किए जाने से ट्रैफिक जाम की दिक्कत बढ़ती है। ट्रैफिक जाम से प्रदूषण बढ़ता है।