दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय
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देश की राजधानी दिल्ली में सितंबर महीने के बाद से ही प्रदूषण की समस्या गहराने लगती है, जो दिसंबर-जनवरी तक बेहद गंभीर हो जाती है। लेकिन सरकार ने अब केवल ठंड आने के बाद ही प्रदूषण से बचने की कोशिश करने वाली सोच को त्यागकर साल के बारह महीने इसके लिए प्रयास करने की रणनीति अपनाई है। इसके लिए सरकार कई उपाय कर चुकी है और अब अगले चरण में जनता की सहभागिता बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, क्योंकि जनसहभागिता के बिना पर्यावरण का कोई भी प्रयास कभी सफल नहीं हो सकता है।
दिल्ली को प्रदूषण मुक्त रखने के विषय पर दो दिवसीय राउंड टेबल कांफ्रेंस रखने के बाद पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसके पर्यावरण पर पड़ोसी राज्यों का गहरा असर पड़ता है। सरकार ने अपने स्तर पर पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए कई प्रयास किये हैं जिनका सफल परिणाम भी मिल रहा है, लेकिन इन प्रयासों की भी एक सीमा है।
जैसे कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली को स्वच्छ रखने के लिए वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई है, लेकिन दिल्ली में बेहद सीमित भूमि होने के कारण इस प्रेस की एक निश्चित सीमा है। इससे ज्यादा पेड़ नहीं लगाये जा सकते। इसी प्रकार अन्य प्रयासों की भी एक निश्चित सीमा है।
मंत्री ने कहा कि इसलिए अब दिल्ली को स्वच्छ रखने के लिए समाज के सभी लोगों को साथ लेने की रणनीति अपनाई जाएगी। सरकार लोगों को बताएगी कि उनके किस प्रयास से दिल्ली को प्रदूषण मुक्त रखने में मदद मिल सकती है और उन्हें क्या करना चाहिए।