फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया, प्रसव से पहले अनिवार्य नहीं होगी कोरोना जांच

Thu, 16 Jul 2020 04:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
विज्ञापन
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)
विज्ञापन

प्रसव से पहले सभी गर्भवती महिलाओं की कोविड-19 जांच कराना अनिवार्य नहीं है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी महिला की जांच करवाई जा सकती है। दिल्ली सरकार ने यह जानकारी बुधवार को संबंधित मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को दी। हाईकोर्ट ने इन महिलाओं की जांच में लगने वाले समय पर सवाल उठाते हुए दिल्ली सरकार को स्थिति साफ करने का निर्देश दिया था। 

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष दिल्ली सरकार ने इस संबंध में हलफनामा दाखिल किया। दिल्ली सरकार ने हलफनामे में कहा कि अस्पताल में प्रसव से पहले सभी गर्भवती महिलाओं की कोविड-19 जांच करवानी अनिवार्य नहीं है। हालांकि संदिग्ध लगने वाली महिलाओं की जांच पहले करवाई जाएगी।
 
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया उन्हीं महिलाओं की खासतौर पर कोरोना जांच करवाई जाएगी जो कोरोना हॉटस्पॉट वाले इलाकों से हों या किसी कोरोना मरीज के संपर्क में आई हों। इस पर कोर्ट ने कहा कि गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों से स्पष्ट है कि महिलाओं के प्रसव से पहले कोविड-19 जांच के लिए परेशानी नहीं उठानी पडे़गी। लिहाजा कोर्ट इस मामले में आगे और निगरानी नहीं करेगी।
विज्ञापन


वहीं कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि जिन गर्भवती महिलाओं की कोरोना जांच के लिए नमूने लिए जाएं, उनकी रिपोर्ट आने में 24 घंटे से ज्यादा का समय नहीं लगना चाहिए। गर्भवती को ऐसी हालत में ज्यादा इंतजार नहीं करवाया जा सकता। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह गर्भवती महिलाओं संबंधी दिशा-निर्देशों को सरकारी व निजी अस्पतालों में तत्काल पहुंचाएं। 

गर्भवती महिलाओं के अलावा पीठ ने दिल्ली सरकार की ओर से कोविड-19 जांच में तेजी लाने को लेकर पेश किए गए आंकड़ों पर संतुष्टी जताई। पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि संक्रमण से ज्यादा से ज्यादा जांच करके ही निपटा जा सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें