दिल्ली सरकार अनधिकृत कॉलोनियों का सीमांकन करने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करने जा रही है। इसका काम राजस्व विभाग को सौंपा गया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास लंबित है। दिल्ली सरकार को अभी सीमांकन के लिए कॉलोनियों का सर्वे करना है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया चलेगी।
दिल्ली विधानसभा में बीते दिनों भाजपा अध्यक्ष जगदीश प्रधान के एक सवाल के जवाब ने यह जानकारी दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने दी। सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली सरकार अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने पर संजीदा है। इससे जुड़ा एक प्रस्ताव 2015 में केंद्रीय शहरी आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के पास लंबित है।
सत्येंद्र जैन ने बताया कि केंद्रीय मंत्रालय ने कॉलोनियों के सीमांकन की जानकारी मांगी थी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने गुरू गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्विद्यालय, सर्वे ऑफ इंडिया व भू स्थानिक दिल्ली लिमिटेड (जीएसडीएल) से संपर्क किया था, लेकिन तीनों एजेंसियां सर्वे करने में नाकाम रहीं। इसके बाद दो अन्य एजेंसियों को इसका जिम्मा दिया गया, लेकिन दोनों एजेंसियों के तयशुदा समय में काम न कर पाने से राजस्व विभाग की सलाह पर उन्हें प्रोजेक्ट से हटा दिया गया।
दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग ने दूसरी एजेंसियों की जगह अब राजस्व विभाग को इस काम की जिम्मेदारी दी है। राजस्व विभाग ड्रोन तकनीक से अनधिकृत कॉलोनियों का सर्वे करेगी। उम्मीद है कि जल्द ही काम पूरा हो जाएगा। केंद्र सरकार से नियमावली में मंजूरी के बाद ही स्वामित्व या रजिस्ट्री शुरू हो सकेगी।