संविधान की शपथ लेकर उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पद पर बैठने वाले उसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं। कानूनन देश का हर नागरिक एक चश्मे से देखा जाना चाहिये। लेकिन मुख्य सचिव की मौखिक शिकायत पर दो विधायकों को जेल भेज दिया जाता है।
जबकि सचिवालय में मंत्री व उनके सहयोगी व डीडीसीए के चेयरमैन पर हुये हमले का प्रमाण होने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे साफ लगता है कि आप के खिलाफ उपराज्यपाल पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहे हैं।
बीते चार दिनों से वह खुलकर भाजपा के एजेंट की भूमिका अदा कर रहे हैं। साजिश दिल्ली सरकार को बर्खास्त करने की है। आशुतोष ने इस मौके पर पांच लोगों के नाम भी सार्वजनिक किये।
साथ ही मुख्य सचिव की एमएलसी व मुख्यमंत्री आवास के सीसीटीवी फुटेज के समय के अंतर का भी उन्होंने जिक्र किया। आशुतोष ने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल पहले आरएसएस के सहयोगी संगठन विवेकानंद फाउंडेशन में काम कर चुके हैं।
ऐसे में उनसे संवैधानिक दायित्व निभाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। वहीं, सांसद संजय सिंह ने कहा कि अगर मुख्य सचिव की एमएलसी सही है तो फिर सवाल ये है कि मुख्य सचिव के चेहरे पर वो घाव कहां से आए? किसने मुख्य सचिव के साथ मारपीट की गई?
मुख्यमंत्री के आवास से वह रात साढ़े ग्यारह बजे ही निकल गए थे, लेकिन एमएलसी में उनके साथ मारपीट रात 12 बजे के बाद बताई गई है। संजय सिंह ने कहा कि या तो मुख्य सचिव झूठ बोल रहे हैं या फिर वो एमएससी ही फर्जी है।