टैक्सी स्कीम, 2017 के ड्राफ्ट को सत्येंद्र जैन के नेतृत्व वाले पैनल ने तैयार किया है। खबर है कि यह पैनल जल्द ही अपनी अंतिम रिपोर्ट दिल्ली कैबिनेट को भेज सकता है। दिल्ली परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि राजधानी में कैब यातायात का प्रमुख साधन है और बड़े पैमाने पर यात्री ओला उबर व अन्य कैब बुक करते हैं। इन्हें नियमित करने के लिए ही जरूरी नियम बनाए जा रहे हैं।
एग्रीगेटर्स को करने होंगे ये काम
जब एक बार नियम लागू हो जाएंगे तो ऐप आधारित कैब एग्रिगेटर्स को
-दिल्ली में संचालन के लिए परिवहन विभाग से लाइसेंस लेना होगा,
-इन कंपनियों को चौबीस घंटे चलने वाले कॉल सेंटर चलाने होंगे,
-अपनी हर कैब का लाइव जीपीएस डेटा परिवहन विभाग के कंट्रोल सेंटर को सौंपना होगा,
-कंपनियों को अपने ऐप को स्टैंडराइजेशन टेस्टिंग एंड क्वालिटी सर्टिफिकेशन द्वारा मान्यता प्राप्त कराना होगा या इलेक्ट्रॉनिक एंड आईटी मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य किसी अधिकृत एजेंसी से सर्टिफिकेट प्राप्त करना होगा।
-कैब में पैनिक बटन लगवाना होगा जो आपातकाल के समय में स्थानीय पुलिस से संपर्क कर सके,
-यात्रियों को कम से कम दो लोगों से अपना लोकेशन शेयर करने की सुविधा हो,
-ऐप में फायरवाल का निर्माण कराना होगा ताकि यात्रियों का पर्सनल डाटा लीक न हो।
कैब एग्रीगेटर कंपनियां नहीं कर सकतीं ये काम
-यात्री को ले जाने से मना नहीं कर सकते,
-कैब चालक जाति, धर्म, लिंग, नस्ल, राष्ट्रीयता या शारीरिक असमर्थता के आधार पर सवारी ले जाने से मना नहीं कर सकते,
-ज्यादा पैसे वसूल नहीं करने हैं, ऐसा करने पर सबसे छोटे रूट से जाने पर जितना पैसा लगेगा वो चार्ज करना है और नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।