हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों के छात्रों व उनके परिजनों के आधार व वोटर आई कार्ड का डाटा एकत्र करने को लेकर जारी अधिसूचना पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है। अदालत इस मामले में एक अक्टूबर को सुनवाई करेगी।
दरअसल, दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने 11 सितंबर को अधिसूचना जारी कर सरकारी स्कूलों के 87 लाख छात्रों का आधार व वोटर आई कार्ड का डाटा 21 सितंबर तक एकत्र करने का आदेश दिया था। राजकीय विद्यालय अध्यापक एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता कमलेश कुमार मिश्रा ने जनहित याचिका दायर कर इसे चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना व एस चंद्रशेखर की खंडपीठ ने पूछा कि छात्रों से यह डाटा क्यों मंगाए जा रहे हैं। इस पर दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि दिल्ली के स्कूलों में पड़ोसी राज्यों के बच्चे भी दाखिला लेते है। इससे राजधानी में रहने वाले छात्रों को स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाता। यह डाटा एकत्र होने से ऐसे छात्रों को दाखिला लेने से रोका जा सकेगा।
खंडपीठ ने इस पर दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार इस तरह बच्चों को दाखिला लेने से कैसे रोक सकती है। यहां के स्कूलों में अच्छी पढ़ाई होती है इसलिए बाहरी छात्र पढ़ने आते हैं। इस पर सरकार को गर्व होना चाहिए। सरकार का आदेश पूरी तरह से गलत है इसलिए इसे रद्द किया जाएगा। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में आधार पर बुधवार को फैसला आना है। इसलिए इस याचिका पर सुनवाई बाद में की जाए।