दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट से कहा कि लॉकडाउन के दौरान जिन गैर सहायता प्राप्त निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) वर्ग के छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा नहीं मिल रही, उनके खिलाफ शिक्षा विभाग कार्रवाई कर रहा है। ऐसे 15 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को निशुल्क: लैपटॉप, आई पैड या स्मार्ट फोन, हाई स्पीड इंटरनेट सुविधा के साथ मुहैया क्यों नहीं कराए गए? शिक्षा विभाग ने कोर्ट को आश्वासन दिलाया कि ईडब्ल्यूएस या वंचित समूह के सभी छात्रों को ऑनलाइन क्लासेस दी जाएंगी।
निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई से संबंधित सुविधाएं मुहैया नहीं कराने पर जस्टिस फॉर ऑल एनजीओ की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस पर न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने 8 मई को दिल्ली और केन्द्र सरकार समेत संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा था।
याचिका में कहा गया कि लॉकडाउन के कारण स्कूलों द्वारा शिक्षा के लिए ऑनलाइन क्लासेस सिस्टम शुरू किया गया। लेकिन ईडब्ल्यूएस और वंचित समूह के छात्रों के पास लैपटॉप, आई पैड या स्मार्ट फोन नहीं होने की वजह से वे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। याचिका में दावा किया गया कि ऐसा होने से करीब 50 हजार छात्रों के भविष्य पर असर पड़ेगा। इसलिए छात्रों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
याचिका के जवाब में दिल्ली सरकार के वकील रमेश सिंह ने कहा कि शिक्षा निदेशालय की ओर से गैर सहायता प्राप्त निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों को नोटिस जारी किए गए हैं। निदेशालय ने 29 अप्रैल को ही सभी निजी स्कूलों को सर्कुलर जारी कर कहा था कि आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित समूह या विशेष जरूरत वाले छात्र किसी भी हालत में ऑनलाइन क्लासेस से वंचित ना रहें। उन्हें सामान्य वर्ग के छात्रों की तरह सभी सुविधाएं देना अनिवार्य है।