प्रदूषण को रोकने के लिए ग्रीन दिल्ली एप विकसित किया जा रहा है। इसी महीने यह एप बनकर तैयार हो जाएगा। इस एप के माध्यम से आम लोग प्रदूषण की शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगर कही कूड़ा जल रहा हो, ट्रक प्रदूषण फैला रहे हो या अन्य तरीके से शहर प्रदूषित हो रहा हो तो इस एप के माध्यम से दिल्ली के लोग वीडियो या फोटो अपलोड करेंगे। हर तरह की शिकायत का समाधान इस एप के माध्यम से किया जाएगा।
एप पर रोज मुख्यमंत्री खुद मॉनीटरिंग करेंगे
एप पर मिलने वाली रोजाना शिकायत की मॉनीटरिंग मुख्यमंत्री खुद करेंगे। साथ ही प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली सरकार एक वॉर रूम तैयार कर रही है। इस वॉर रूम में प्रदूषण रोकने की रोजाना मॉनीटरिंग की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार नई ट्री-प्लांटेशन नीति तैयार कर रही है। कोई भी एजेंसी अगर पेड़ काटती है तो 80 प्रतिशत पेड़ को जैसी स्थिति में है वैसी स्थिति में स्थानांतरित करना होगा। सिर्फ एक पेड़ काट कर दस पौधा लगाने की नीति में इस तरह से बदलाव किया जाएगा। इस तरह से 80 प्रतिशत पेड़ को ट्रांसप्लांट किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के तहत इस साल लोगों को सब्सिडी भी मिलने लगेगी।
एंटी डस्ट कैंपेन सरकार शुरू करेगी
प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार एंटी डस्ट कैंपेन शुरू करेगी। मिट्टी उड़ने की वजह से भी प्रदूषण फैलता है, इसके लिए निर्माणाधीन स्थलों पर इंस्पेक्शन लगातार की जाएगी। इस कैंपेन के तहत चालान भी किया जाएगा।
मैकेनिकल स्वीपर यानी स्वचालित मशीन से सड़कों की सफाई की जाएगी। सड़क पर झाड़ू लगाने से धूल उड़ती है और प्रदूषण का कारण बनती है। इससे निजात मिलेगी। सड़क पर जो भी गड्ढे हैं उन्हें ठीक किया जाएगा ताकि मिट्टी वहां जमा नहीं हो सके। एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में हॉट स्पॉट 13 प्वाइंट ढूंढा गया है। जहां सबसे अधिक प्रदूषण फैलता है। ऐसे चिन्हित स्थलों के लिए अलग से योजना तैयार की गई है।
अन्य राज्यों से की अपील
मुख्यमंत्री ने आसपास के राज्यों से अपील है कि पराली जलाने पर अगर रोक नहीं लगा सकते तो कम से कम जिस तरह का कदम दिल्ली सरकार उठा रही है वैसे ही इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठाएं। सभी को मिलकर हवा को साफ करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कहते हैं कि हमें सरकारों से मदद चाहिए। जैसे दिल्ली सरकार ने वैकल्पिक समाधान निकाला है। वैसे ही अन्य राज्य भी समाधान ढूंढे । ताकि पराली किसानों के लिए इनकम का श्रोत बन सके। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद यह प्लांट चल रहा है। आसपास ईट के भट्टे भी चल रहे हैं। इसपर रोक लगाने की आवश्यकता है। क्योंकि यह समस्या अकेली दिल्ली की नहीं है।