दिल्ली नाईट कर्फ्यू: प्रतीकात्मक तस्वीर
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दिल्ली सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि कारोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए दिल्ली या उसके कुछ हिस्सों में नाइट कर्फ्यू लगाने पर विचार नहीं किया जा रहा। सरकार ने हाईकोर्ट में पेश जवाब में कहा कि नाइट कर्फ्यू लगाने की जरूरत नहीं है बल्कि कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए हर प्रकार के प्रयास किए जा रहे है। इतना ही नहीं सभी प्राइवेट अस्पतालों को एलईडी स्क्रीन पर नोडल अधिकारी के नाम व फोन नंबर के अलावा रिक्त कोविड वेड की संख्या दर्शाने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए जांच और संक्रमित लोगों के सम्पर्क में आए लोगों की पहचान पर ध्यान केंद्रित किया जाए। इतना ही नहीं यदि जांच के नतीजे अब भी 24 घंटे के अंदर नहीं आ रहे हैं और इस पर गौर किए जाने की जरूरत है।
अदालत ने दिल्ली सरकार से ये भी कहा कि कोरोना की जांच के नतीजे मोबाइल फोन पर देने की कोशिश करें। दिल्ली सरकार ने खंडपीठ के हालही में पूछे गए नाइट कर्फ्यू संबंधी सवाल के जवाब में कहा कि दिल्ली में फिलहाल स्थिति में सुधार हो रहा है ऐसे में नाइट कर्फ्यू लगाने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया कि सरकार ने प्रतिबंधित गतिविधियों में 31 दिसंबर तक किसी भी प्रकार की छूट न देने का निर्णय किया है। इतना ही नहीं किसी भी प्रकार की नई गतिविधियों की भी इजाजत नहीं होगी।
अदालत अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 के मरीजों की संख्या पुन: बढ़ने पर चिंता जताते हुए जांच बढ़ाने व रिपोर्ट जल्द प्रदान करने की मांग की है।