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कटघरे में आए निर्भया के दोषियों को बचाने वाले वकील

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भारत में प्रतिबंधित बीबीसी की डाक्यूमेंट्री इंडियाज डॉटर में महिलाओं के बारे में अपमान जनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले दो वकीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अखितार किया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों ही वकीलों से अपने बयान पर सफाई देने को कहा है। बता दें कि दिसंबर 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप मामले में आरोपियों की तरफ से केस लड़ने वाले वकील एमएल शर्मा और एके सिंह ने इस डाक्यूमेंट्री में ऐसा बयान दिया जिस पर कोर्ट ने आपत्ति दर्ज कराई गई थी।

बीबीसी के लिए लेस्ली उडविन द्वारा बनाई गई डाक्यूमेंट्री में दोनों ही वकीलों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं है। दोनों वकीलों के इस बयान के बाद देश भर में काफी हंगामा हुआ था।
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महिला वकील हुईं खिलाफ

इस बयान के बाद बार काउंसिल ने दोनों ही वकीलों के लाइसेंस रद्द करने तक की मांग कर डाली थी। दोनों ही वकीलों के खिलाफ गुस्सा इतना भड़क गया कि अदालत में इनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई।

सुप्रीम कोर्ट विमेन लॉयर एसोसिएशन द्वारा पेश की गई इस याचिका में मांग की गई कि दोनों ही वकीलों के सुप्रीम कोर्ट के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही दोनों ही वकील अपने बयान के लिए माफी भी मांगें।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस याचिका की सुनवाई करते हुए दोनों ही वकीलों से उनके बयान और याचिकाकर्ताओं के आरोपों पर सफाई मांगी है।
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